‘नीट यूजी परीक्षा 100% एरर-फ्री होगी’: जागरण भारत एजुकेशन कॉन्क्लेव में शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan का बयान…

Jagran Bharat Education Conclave 2026 के मुख्य अतिथि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट-यूजी परीक्षा पर बड़ा बयान दिया।

उन्होंने, “कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हम नहीं चाहते थे कि जो हमारे देश के बच्चे हैं, वो देश के शिक्षा माफिया के चंगुल में फंस जाए। इसलिए हमने नीट परीक्षा को रद किया। लोकतंत्र में हम वचनबद्ध हैं ,देश के सामने 21 जून को जो परीक्षा होगी उसको शत प्रतिशत एरर फ्री करना यह हमारा दायित्व है।”

हमें कुछ कोठर निर्णय लेने पड़े- धर्मेंद्र प्रधान

अभी देश में 22 लाख बच्चों को मानसिक यंत्रणा हुई है, उस यंत्रणा को समझते हुए, जिम्मेदारी लेते हुए कहता हूं, हमें कुछ कठोर निर्णय लेने पड़े, और इस बार की जेईई यूजी-नीट परीक्षा को रद करना पड़ा। हम नहीं चाहते थे कि एजूकेशन में जो गड़बढ़ लोग हैं, जो पेपर माफिया हैं, उनके षणयंत्र में हमारा एक भी छात्र अपने अधिकार से वंचित हो। हमारा दायित्व इसको व्यवस्थित करना है।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हमारा दायित्व समस्या को देखकर आंख बंद करना नहीं है, हमारा दायित्व लोकतंत्र में जिम्मेदारी का है। हम देश के सामने वचनबद्ध हैं कि 21 जून को जो नीट की परीक्षा होगी उसे शत प्रतिशत एरर फ्री कराएंगे। ये हमारा दायित्व है।

न्यू एजूकेशन पॉलिसी पर क्या बोले प्रधान?

धर्मेंद्र प्रधान ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा से लेकर न्यू एजूकेशन पॉलिसी तक का जिक्र किया। कश्मीर की सरस्वती ज्ञान परंपरा से लेकर ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ धाम और कोणार्क के सूर्य मंदिर तक की ऐहिसिकता का जिक्र किया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी ने भारत की शिक्षा प्रणाली की नींव रखी। 70 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राजनीतिक कारणों से भारतीय शिक्षा को मैकाले की शिक्षा पद्धिति की ओर मोड़ दिया।

न्यू एजूकेशन पॉलिसी के तहत मातृभाषा में शिक्षा पर जोर- धर्मेंद्र प्रधान

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की शिक्षा प्रणाली को पुन: भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ते हुए न्यू एजूकेशन पॉलिसी के तहत कक्षा 5 तक मातृभाषा में शिक्षा पर जोर दिया। कक्षा 10 तक 3 भाषाओं को पढ़ाने की योजना है।”

मैं बच्चों को पांच विदेशी भाषा पढ़ने का पक्षधर- धर्मेंद्र प्रधान

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मैं बच्चों को पांच विदेशी भाषा पढ़ने का पक्षधर हूं, जिन बच्चों को विदेश में व्यापार करना है या विदेशियों से डील करनी है उन्हें विदेशी भाषाएं सीखनी चाहिए, लेकिन सब पर थोपी नहीं जानी चाहिए। भारतीय भाषाएं इसलिए पढ़नी चाहिए क्योंकि भारत में पिछले 10 सालों में इनोवेशन में आगे बढ़ रहे हैं।

ग्लोबल साउथ की अपेक्षा भारत के प्रति है- धर्मेंद्र प्रधान

उन्होंने कहा कि प्रोडक्शन में रिसर्च में हमारी आवश्यकता क्या है? भारत में 146 करोड़ लोग से ज्यादा हैं, भारत के साथ ग्लोबल साउथ जुड़ चुका है। ग्लोबल साउथ की अपेक्षा भारत के प्रति है, भारत के सच के ऊपर है, भारत के इनोवेशन के ऊपर है, लो कॉस्ट प्रोडक्शन वैल्यू चैन के ऊपर है, इसके लिए हमें इनोवेटर चाहिए, हमें इंटरप्रिटेटर नहीं चाहिए।

भारत आज ग्लोबल साउथ की आवाज- धर्मेंद्र प्रधान

उन्होंने कहा कि भारत की आबादी 146 करोड़ है, जो दुनिया की 18% है। भारत में 65 प्रतिशत आबादी 35 से कम उम्र की है। विश्व में अगर 800 करोड़ लोग हैं, उसमें से ग्लोबल साउथ में लगभग 400-500 करोड़ रहते हैं। आज भारत ग्लोबल साउथ की आवाज है।

आज भारत ग्लोबल साउथ की आवाज है। हम कभी आक्रांता नहीं रहे हैं। भारत आज दुनिया आकांक्षा को पूरा करने वाला देश बन गया है।

शिक्षा प्रणाली को डिग्री से कॉम्पिटेंसी की ओर ले जाना पड़ेगा- धर्मेंद्र प्रधान

शिक्षा मंक्षी ने कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली को डिग्री से कॉम्पिटेंसी की ओर ले जाना पड़ेगा। अभी हमारी पीएचडी पेपर सेंट्रिक है, आज समय है कि पीएचडी को मौजूदा ज्वलंत मुद्दे से जोड़ने का। भारत के नौजवानों को अवसर मिलेगा तो वो इन आकांक्षाओं को पूरा कर सकेंगे, हमारी शिक्षा नीति उसी ओर आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि जिंदगी एक लाइफ लॉन्ग लर्निंग है, हमें जीवनभर सीखना पड़ता है, लेकिन उसका ऑथेंटिकेशन क्या है। मेरे देश के सीए, अकाउंटेंट दुनिया के अर्थतंत्र को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। भारत का टेलेंट दुनिया को लीड कर रहा है। हमें स्पष्टता और कौशन दोनों अर्जित करना होगा, तभी हम विश्व में आगे बढ़ पाएंगे। हमें अपना मूल्यांकन जरूर करना चाहिए।

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