‘पड़ोसी के घर झुका नारियल का पेड़’: VCK के पाला बदलने पर Dravida Munnetra Kazhagam का तंज, जबकि Tamizhaga Vettri Kazhagam ने विजय का बचाव किया…

तमिलनाडु की राजनीति में शुक्रवार को जुबानी जंग तेज हो गई। डीएमके और उसकी पूर्व सहयोगी विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीकेसी) के बीच मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम को समर्थन देने को लेकर काव्यात्मक नोकझोंक देखने को मिली। इस विवाद के बीच टीवीके भी अपने नए सहयोगी के बचाव में आक्रामक रूप से उतर आई है।

इस सियासी ड्रामे की शुरुआत डीएमके सांसद ए. राजा के एक्स पर किए गए एक पोस्ट से हुई। उन्होंने शास्त्रीय तमिल साहित्य के एक मेटाफर टेढ़े नारियल के पेड़ का जिक्र किया। यह ऐसे पेड़ के लिए इस्तेमाल होता है जो बोया तो अपनी जमीन पर जाता है, लेकिन झुककर अपने फल पड़ोसी की जमीन पर गिराता है।

परंपरागत रूप से यह मेटाफर अयोग्य व्यक्तियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। राजा का यह तंज VCK पर था, जिसने चुनाव में DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन से दो सीटें जीतीं और बाद में TVK के साथ जाकर सत्ता में हिस्सेदारी ले ली।

पड़ोसी के घर झुका नारियल का पेड़

तमिल से अनुवादित राजा के पोस्ट में लिखा था कि अगर मेरे घर के बगीचे का नारियल झुककर सामने वाले घर में अपना पानी देता है, तो साहित्य में उसे मुट्टत्थेंगू कहा जाएगा। राजनीति में हम इसे क्या नाम दें?

एक दूसरे ट्वीट में राजा ने द्रविड़ विचारधारा के संस्थापक पेरियार का हवाला देते हुए लिखा कि भले ही हम स्थिति में बदलाव का इंतजार करेंगे, हम लड़ते रहेंगे और जीत हमारी होगी। राजा ने एक बेहद आपत्तिजनक ट्वीट भी किया था, जिसमें इस पालाबदल की तुलना पति को धोखा देने वाली महिला से की गई थी।

VCK का DMK पर पलटवार

2021 चुनाव में तिरुपोरूर सीट जीतने वाले VCK नेता एसएस बालाजी ने डीएमके के तंज का तीखा जवाब दिया। उन्होंने पूछा कि डीएमके एक शोषित समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली पार्टी के सत्ता में आने से क्यों परेशान है।

VCK को पहले दलित पैंथर्स ऑफ इंडिया के नाम से जाना जाता था। एसएस बालाजी ने तामिल कविता के रूप में पलटवार करते हुए जवाब दिया जिसका हिंदी ट्रांसलेशन नीचे दी गई है।

“विनम्र लोगों को सत्ता मिलना… इसमें इतना गुस्सा क्यों है?
असहायता चारों ओर फैलती है, बदनामी आपको डिगा नहीं पाएगी।
असभ्य लोगों से बचने के लिए इसे शांति से पार करें।
अगर अन्याय जारी रहता है और आप इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं,
और अगर आप लपटों को रोक नहीं पाते हैं, तो आप जल जाएंगे…”

टीवीके ने डीएमके पर निशाना साधा

अपने सहयोगी का बचाव करते हुए, टीवीके ने एक लंबी पोस्ट में डीएमके पर जमकर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि सत्ता में हिस्सेदारी के लोकतांत्रिक सिद्धांत को लेकर राजा की टिप्पणियां राजनीतिक मर्यादा की सीमाओं को पार करती हैं और अशिष्टता की चरम सीमा हैं।

टीवीके ने आगे लिखा कि सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध पार्टियां जब भी अपने अधिकारों की बात करती हैं या वैकल्पिक राजनीतिक दृष्टिकोण रखती हैं, तो डीएमके अपमानजनक आलोचना और धमकी भरा लहजा अपनाती है। यह सिर्फ पार्टी के अहंकार को उजागर करता है।

पार्टी के आईटी सेल ने तंज कसते हुए कहा, “टीवीके की सत्ता-साझेदारी की ईमानदार राजनीति से डीएमके डर गई है। उन्हें लग रहा है कि उनका परिवार-केंद्रित राजनीतिक एकाधिकार खत्म हो जाएगा, इसलिए वे अपना आपा खो बैठे हैं और बेतुकी बातें कर रहे हैं।”

क्यों हो रही है काव्यात्मक नोकझोंक?

डीएमके और वीसीके ने पिछले महीने हुए विधानसभा चुनाव में एक साथ चुनाव लड़ा था। सबको उम्मीद थी कि एमके स्टालिन की पार्टी एक बार फिर भारी जीत दर्ज करेगी, लेकिन अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। इस जीत ने तमिलनाडु की राजनीति में DMK और AIADMK के 59 साल के वर्चस्व को खत्म कर दिया।

हालांकि, TVK बहुमत के आंकड़े (118) से 10 सीटें दूर रह गई थी। कांग्रेस की 5 सीटों ने विजय की पार्टी को कुछ हद तक राहत दी, लेकिन बाकी समर्थन के लिए VCK, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और वामपंथी दलों ने चार दिनों तक सस्पेंस बनाए रखा।

शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया था कि VCK विपक्षी गठबंधन में रहकर विजय को केवल बाहर से समर्थन देगी। लेकिन, इस हफ्ते यह पुष्टि हो गई कि VCK और IUML सरकार में शामिल होंगी और उनके विधायकों को कैबिनेट में जगह मिलेगी। पूर्व सहयोगी का सत्ता में शामिल होना ही डीएमके की इस नाराजगी की मुख्य वजह माना जा रहा है।

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