परीक्षाओं की विश्वसनीयता को बनाए रखने और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने भले ही 2024 में एक सख्त कानून बना चुकी है लेकिन इसके बाद भी देश में गहरी जड़ें जमाकर बैठे परीक्षा माफिया के हौसले इतने बुलंद है कि वह इसके बाद भी पेपर लीक जैसी घटनाओं को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहे है।
वैसे तो परीक्षा माफिया ने सरकार के इस कानून को तभी चुनौती दे दी थी, जब संसद से फरवरी में पारित होने के बाद मई 2024 में हुई नीट-यूजी परीक्षा का पेपर लीक कर दिया था। तब नकल रोकने का यह कानून अधिसूचित नहीं हुआ था। हालांकि पेपर लीक को लेकर तेज हुए विवाद के बीच केंद्र सरकार ने 21 जून 2024 को इसे आनन-फानन में अधिसूचित किया था।
2024 में प्रभावी हुआ नया कानून
एनटीए से वरिष्ठ जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इस कानून के प्रभावी होने के बाद 2024 में ही बिहार और गुजरात में सीबीआई ने नए कानून के तहत मामला दर्ज किया था। 2026 में जब एक बार फिर नीट- यूजी परीक्षा का पेपर लीक हुआ है तब भी सीबीआई ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों के रोकथाम ) अधिनियम-2024 के तहत ही मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
इस कानून के दायरे में एनटीए, एसएससी, यूपीएससी, बैकिंग भर्ती और केंद्रीय स्तर पर होने वाली कोई परीक्षाएं व भर्ती परीक्षाओं को शामिल किया गया था। इस कानून को लाने के समय केंद्र ने दावा किया था कि इससे पेपर लीक व परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगेगी। साथ ही राज्यों से भी इसी पैटर्न पर कानून बनाने का सुझाव दिया था।
क्या कहता है नया कानून?
नए कानून के तहत पेपर लीक सहित परीक्षाओं की गड़बड़ियों से जुड़ा प्रत्येक मामला गैर-जमानती होगा। कोई व्यक्ति यदि अकेले पेपर लीक व गड़बड़ियों में शामिल पाया जाता है तो उसे पांच साल की जेल व दस लाख तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं कोई गिरोह मिलकर इस काम को अंजाम देता है तो इसे संगठित अपराध मानते हुए दस साल तक की सजा और न्यूनतम एक करोड़ के जुर्माने का प्रविधान है।
वहीं परीक्षा कराने वाली एजेंसी यदि इसमें शामिल पायी जाती है तो उस पर एक करोड़ का जुर्माना व अगले चार सालों तक के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। साथ ही परीक्षा का खर्च भी उससे वसूला जाएगा। इन नए नियमों के तहत जुर्माना न चुकाने की स्थिति अपराधियों की संपत्ति भी जब्त कराने का अधिकार दिया गया है।