तेलंगाना में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत लगभग 71 लाख मतदाताओं की पहचान की गई है, जिनके नाम सूची से हटाए जा सकते हैं। यह संख्या राज्य के कुल 3.38 करोड़ मतदाताओं का लगभग 21 प्रतिशत है।
इसका सीधा मतलब है कि राज्य में हर पांच में से कम से कम एक मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से कट सकता है। राज्य में गणना फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि 10 अगस्त तय की गई है।
71 लाख नामों को हटाने का क्या है कारण?
नौ अगस्त तक केवल 3.2 लाख फॉर्म ही ऐसे थे जिन्हें डिजिटाइज किया जाना बाकी था, जो कि कुल मतदाता सूची का 1 प्रतिशत से भी कम है। इसके पूरे होने पर नामों को हटाने का अंतिम आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
जिन लगभग 71 लाख नामों को अनकलेक्टिबल मानकर हटाने के लिए चिन्हित किया गया है, उनमें से 9.1 लाख मृत मतदाता हैं और 10.3 लाख मतदाता अनुपस्थित या लापता हैं।
इसके अलावा, 43 लाख मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि 6.6 लाख नाम डुप्लीकेट यानी दोहरे मतदाताओं के तौर पर दर्ज पाए गए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) सी. सुदर्शन रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि असंग्रहीत श्रेणी में आने वाले सभी मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाएंगे।
ग्रेटर हैदराबाद क्षेत्र में सबसे ज्यादा नाम प्रभावित
असंग्रहीत फॉर्मों का सबसे बड़ा केंद्र ग्रेटर हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में देखा गया है। केवल हैदराबाद, मेडचल-मलकाजगिरि और रंगारेड्डी जिलों में ही कुल मिलाकर 41.5 लाख असंग्रहीत फॉर्म मिले हैं। यह आंकड़ा राज्य के कुल 70.8 लाख असंग्रहीत फॉर्मों का लगभग 58.6 प्रतिशत है।
अगर अलग-अलग बात करें तो हैदराबाद जिले में 18,45,595 असंग्रहीत फॉर्म मिले हैं, जो वहां के कुल मतदाताओं का 38.96 प्रतिशत है और तीनों महानगरों में सबसे अधिक है। वहीं, मेडचल-मलकाजगिरि जिले में 10,62,190 (35.65 प्रतिशत) और रंगारेड्डी जिले में 12,41,188 (33.55 प्रतिशत) फॉर्म जमा न किया गया हैं।
इन तीनों जिलों में मिलाकर लगभग 1.14 करोड़ मतदाता हैं, जो राज्य के कुल मतदाताओं का करीब 33.7 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं, लेकिन असंग्रहीत फॉर्मों के मामले में इनकी हिस्सेदारी 58.6 प्रतिशत है। शहरी क्षेत्रों में नाम कटने की इतनी बड़ी दर के पीछे कई कारण हैं।
इनमें मुख्य रूप से लोगों का पलायन, किराएदारों का मकान बदलना, बंद पड़े घर, गेटेड कम्युनिटीज, मृत मतदाता और स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट होना शामिल है।
उत्तरी और पश्चिमी तेलंगाना में भी भारी अंतर
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में अब तक 2.64 करोड़ यानी 78.1 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं और बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा सत्यापित भी हो चुके हैं। इसके साथ ही, उत्तरी और पश्चिमी तेलंगाना के हिस्सों में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का एक अलग ही रुझान देखने को मिला है, जहां विसंगति दर काफी अधिक दर्ज की गई है।
जिला स्तर पर बात करें तो आदिलाबाद में 28.5 प्रतिशत मतदाताओं के मामलों में विसंगति पाई गई है। इसके बाद निजामाबाद में 27.4 प्रतिशत, निर्मल में 26.1 प्रतिशत, मेदक में 24.6 प्रतिशत, कामारेड्डी में 23.9 प्रतिशत और संगारेड्डी में 23.8 प्रतिशत है।
इसी तरह, विधानसभा क्षेत्र के स्तर पर भी आदिलाबाद में 30.4 प्रतिशत, नारायणखेड़ में 29.3 प्रतिशत, निज़ामाबाद अर्बन में 28.4 प्रतिशत, शादनगर में 28.3 प्रतिशत, निर्मल में 28.29 प्रतिशत और निजामाबाद रूरल में 28.1 प्रतिशत की उच्च विसंगति दर दर्ज की गई है।
गणना फॉर्म जमा करने की अंतिम समय-सीमा की पूर्व संध्या पर आए ये आंकड़े स्पष्ट रूप से राज्य में दो अलग-अलग भौगोलिक रुझानों को दर्शाते हैं।