पिछले वर्ष ट्रंप प्रशासन ने भारत पर कई तरह के शुल्क लगाकर द्विपक्षीय संबंधों को जिस तरह से असहज किया था, उसके दूर होने के संकेत हैं।
रिश्तों में जमी बर्फ पिघलाने भारत आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।
बैठक में कारोबार, प्रौद्योगिकी समेत द्विपक्षीय हितों के सभी मुद्दों के साथ ही पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर भी विस्तार से विमर्श हुआ। रूबियो ने मोदी से कहा कि अमेरिका ईरान को कभी वैश्विक ऊर्जा बाजार को बंधक बनाने की छूट नहीं देगा।
चार दिवसीय यात्रा के दौरान रूबियो की विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ भी मुलाकात होगी और वह नई दिल्ली में क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे।
यह रूबियो की पहली भारत यात्रा है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने पीएम मोदी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संदेश दिया और उन्हें अमेरिका की यात्रा के लिए आमंत्रित भी किया।
पीएम मोदी और रूबियों की मुलाकात
वैसे दोनों नेताओं की अगले महीने फ्रांस में समूह-7 देशों की बैठक में भी मुलाकात की तैयारी चल रही है।रूबियो से मुलाकात के बाद मोदी ने इंटरनेट मीडिया पर लिखा-अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का स्वागत कर खुशी हुई। हमने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक सामरिक साझेदारी में निरंतर प्रगति और क्षेत्रीय तथा वैश्विक शांति एवं सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।
भारत और अमेरिका वैश्विक हित के लिए निकटता से काम करते रहेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान में कहा कि पीएम मोदी और रूबियो के बीच रक्षा व कारोबारी संबंधों को नई मजबूती देने पर बात हुई है।
उल्लेखनीय है कि कूटनीतिक मोर्चे पर दुनिया के कई देशों के साथ संबंधों में आई तल्खियों के बाद अमेरिका को भारत की याद आई है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से दी गई जानकारी में कहा गया है कि रूबियो ने प्रधानमंत्री मोदी को रक्षा, रणनीतिक प्रौद्योगिकियों, व्यापार एवं निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, कनेक्टिविटी, शिक्षा और दोनों देशों की जनता के बीच संबंधों सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग पर निरंतर प्रगति की जानकारी दी।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर मोदी ने संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया। बैठक में दोनों पक्षों ने ‘मिशन 500’ के तहत 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने, रक्षा सहयोग गहरा करने और महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग तेज करने पर सहमति जताई। ‘मिशन 500’ दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार बढ़ाकर 500 अरब अमेरिकी डालर करने से संबंधित है।
14 साल बाद अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता आगमनरूबियो ने अपनी पहली भारत यात्रा की शुरुआत कोलकाता से की। रूबियो और उनकी पत्नी जेनेट का स्वागत अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने किया। 14 साल बाद किसी अमेरिकी विदेश मंत्री का कोलकाता आगमन हुआ है।
इससे पहले 2012 में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन कोलकाता आई थीं। रूबियो ने कोलकाता में मिशनरीज आफ चैरिटी के मदर हाउस का दौरा किया और मदर टेरेसा की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। देर शाम नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में रूबियो का भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी उपस्थित थे।
रूबियो ने की भारत की तारीफ
वहां रूबियो ने संक्षिप्त भाषण में भारत को अमेरिका का “अत्यंत महत्वपूर्ण साझेदार” बताया और कहा कि दोनों देश आने वाले महीनों में कुछ महत्वपूर्ण घोषणाओं के माध्यम से संबंधों को और मजबूत करने की योजना बना रहे हैं। रूबियो का स्वागत करते हुए गोर ने यहां कहा कि एक मजबूत भारत और मजबूत अमेरिका आज दुनिया के लिए बहुत जरूरी हो गया है।
जयशंकर के साथ रूबियो की द्विपक्षीय वार्ता आजरूबियो की रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसमें व्यापार, रक्षा सहयोग, आपूर्ति शृंखला सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियां, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दे शामिल होंगे। इस यात्रा का समापन 26 मई को नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के साथ होगा।
इसमें अमेरिका, भारत, जापान और आस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री शामिल होंगे। बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त एवं खुला समुद्र, समुद्री सुरक्षा, कनेक्टिविटी, उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग और क्षेत्रीय चुनौतियों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है।