ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से सोमवार शाम चार बजे निकलने वाली श्रावण मास की दूसरी सवारी में इस बार एक बड़ा बदलाव नजर आएगा। भगवान महाकाल की सवारी में वर्षों से शामिल हाथी श्यामू इस बार साथ नहीं होगा।
पशु चिकित्सकों ने बीमारी के चलते श्यामू को सवारी के लिए अस्वस्थ घोषित कर दिया है। उसकी जगह मादा हाथी सुमा सवारी में शामिल होंगी। मंदिर समिति, वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग ने सुमा को सवारी में शामिल करने की सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं।
क्या है महाकाल मंदिर की परंपरा?
महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार श्रावण-भाद्रपद मास की दूसरी सवारी से अंतिम राजसी सवारी तक भगवान महाकाल चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर और हाथी पर मनमहेश रूप में नगर भ्रमण करते हैं। सोमवार को भक्तों को भगवान के इन दोनों स्वरूपों के दर्शन होंगे। अंतर सिर्फ इतना होगा कि इस बार मनमहेश के साथ श्यामू की जगह सुमा होगी।
जिला वन मंडल अधिकारी अनुराग तिवारी ने बताया कि इस बार सवारी में हाथी सुमा को शामिल करने के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। पशु चिकित्सकों ने स्वास्थ्य की जांच की है। सवारी मार्ग पर चलाकर क्षमता देखी। भीड़ में उसके व्यवहार की प्रतिक्रिया परखी। धार्मिक स्वरूप के साथ सुरक्षित चलने की क्षमता जांच ली है।
रामू से श्यामू तक, 46 साल जुड़ा रहा परिवार
भगवान महाकाल की सवारी से श्यामू और उसके परिवार का जुड़ाव करीब 46 साल पुराना है। साईंनाथ कालोनी निवासी सरमन गिरि महाराज और उनके हाथियों का परिवार वर्ष 1980 से महाकाल की सवारी से जुड़ा रहा है। वर्ष 1980 से 2016 तक श्यामू की मां रामू सवारी में शामिल होती थी।
2026 में हुई थी रामू की मृत्यू
2016 में रामू की मृत्यु के बाद श्यामू को सवारी में शामिल किया गया। इस वर्ष भी मंदिर समिति ने हाथी मालिक सरमन गिरि को पत्र भेजकर श्यामू को सवारी में शामिल करने की जानकारी दी थी, लेकिन बीमारी के कारण अंतिम समय में अनुमति नहीं मिल सकी। इसके साथ ही हाथियों के इस परिवार की साढ़े चार दशक पुरानी सेवा परंपरा में बदलाव हो गया।