जालंधर में एलएडीसी (लीगल एड डिफेंस काउंसिल) नीति के विरोध में जिला बार एसोसिएशन का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार को आंदोलन के पांचवें दिन भी वकीलों ने भूख हड़ताल जारी रखी। इसके साथ ही ‘नो वर्क डे’ के आह्वान के कारण जिला अदालतों में न्यायिक कार्य बुरी तरह प्रभावित रहा।
बड़ी संख्या में मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी और उन्हें अगली तारीखों के लिए स्थगित करना पड़ा। इससे अदालत पहुंचे पक्षकारों और आम लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सोमवार को शहर में वाल्मीकि समाज की ओर से पंजाब बंद और विरोध प्रदर्शन का असर देखने को मिला।
इसी बीच जिला बार एसोसिएशन का आंदोलन भी पूरे जोर-शोर से जारी रहा। बार एसोसिएशन के आह्वान पर 50 से अधिक अधिवक्ता भूख हड़ताल पर बैठे, जबकि सैकड़ों वकीलों ने बार परिसर में धरना देकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
नीति से युवा वकीलों के रोजगार पर गहराया संकट
प्रदर्शन कर रहे वकीलों का कहना है कि एलएडीसी व्यवस्था लागू होने से स्वतंत्र वकालत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उनका आरोप है कि इस नीति के कारण खासकर युवा वकीलों के सामने रोजगार का संकट गहरा सकता है। उनका कहना है कि यदि यह व्यवस्था इसी तरह जारी रही तो नए अधिवक्ताओं के लिए पेशे में अपनी पहचान बनाना और अधिक कठिन हो जाएगा।
वकीलों ने सरकार पर उनकी मांगों की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि कई बार विरोध दर्ज कराने और अपनी बात रखने के बावजूद अब तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है। इसी कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मांगें न माने जाने तक हड़ताल रहेगी जारी
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार एलएडीसी नीति पर पुनर्विचार कर अधिवक्ताओं की मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक भूख हड़ताल और ‘नो वर्क’ आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
वहीं, अदालतों में कामकाज ठप रहने से दूर-दराज से अपने मामलों की सुनवाई के लिए पहुंचे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। कई मामलों की सुनवाई अगली तारीख पर टाल दी गई, जिससे न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित हुई।
बार एसोसिएशन का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि ऐसी नीति के विरोध में है जिसे वे अधिवक्ताओं और न्याय व्यवस्था दोनों के हित में उचित नहीं मानते। वकीलों ने सरकार से जल्द बातचीत कर समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और भी तेज किया जाएगा।