केंद्र सरकार द्वारा अंतिम नियम जारी किए जाने के बाद कांग्रेस ने इसे मजदूरों-कामगारों के हित पर आघात बताते हुए इसकी तीखी आलोचना की है। पार्टी ने दावा किया कि लेबर कोड से जुड़ी यह नई नियमावली स्वतंत्रता के बाद से मजदूरों के अधिकारों के लिए सबसे बड़ा झटका है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि चारों नए लेबर करोड़ों मजदूरों के लिए ‘हायर-एंड-फायर’ (जब चाहें नौकरी पर रखना और जब चाहें निकाल देना), ठेका-आधारित रोजगार और श्रम यूनियन बनाने के लिए सीमित गुंजाइश देते हैं।
यूपीए सरकार में श्रम मंत्री रहे मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि हमेशा की तरह कायरतापूर्ण अंदाज में मोदी सरकार ने चुनाव खत्म होने का इंतजार किया और फिर 8-9 मई 2026 को चार ‘मजदूर-विरोधी’ लेबर कोड को अधिसूचित कर दिया।
खरगे ने दावा करते हुए कहा कि देश में 90 प्रतिशत मजदूर असंगठित क्षेत्र में हैं और उनके लिए यह श्रम संहिता कागजी औपचारिकता से ज्यादा कुछ साबित नहीं हुई है क्योंकि छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को कुछ प्रावधानों से छूट मिली हुई है। इसी तरह गिग वर्कर्स के लिए फंडिंग, योगदान या बीमा का कोई स्पष्ट माडल नहीं है।
उन्हें न कर्मचारी के तौर पर मान्यता दी गई है और न ही पूरी सुरक्षा। मजदूरों के लिए कांग्रेस के अपने ²ष्टिकोण की चर्चा करते हुए खरगे ने कहा कि हम अपने पांच-सूत्रीय ‘श्रमिक न्याय’ एजेंडे के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
इसमें मनरेगा की बहाली और शहरी क्षेत्रों तक इसका विस्तार, मनरेगा समेत राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी 400 रुपए प्रतिदिन करने, स्वास्थ्य का अधिकार कानून जिसमें 25 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज, सभी असंगठित श्रमिकों के लिए जीवन और दुघर्टना बीमा समेत व्यापक सामाजिक सुरक्षा आदि शामिल हैं।
खरगे ने कहा कि कांट्रैक्ट आधारित रोजगार की प्रणाली रोकने के लिए कांग्रेस प्रतिबद्ध है और सरकार में आए तो श्रम कानूनों को कमजोर करने की मोदी सरकार के कदमों की समीक्षा की जाएगी।