कोरिया : लखपति दीदी साधना कुजूर की आत्मनिर्भरता की प्रेरक यात्रा…

कोरिया जिले की ग्राम पंचायत पतरापाली की निवासी साधना कुजूर आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं।

कभी गृहिणी के रूप में परिवार और कृषि कार्यों तक सीमित रही साधना कुजूर ने अपने परिश्रम, आत्मविश्वास और बिहान योजना के सहयोग से आर्थिक स्वतंत्रता की नई पहचान बनाई है।

पहले साधना कुजूर को आर्थिक संसाधनों की कमी और स्वयं का व्यवसाय शुरू करने में संकोच होता था। लेकिन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।

जनवरी 2025 को वे दीपिका स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह की नियमित बैठकों, प्रशिक्षणों और वित्तीय सहयोग ने उनमें आत्मविश्वास जगाया। उन्होंने यह समझा कि सामूहिक प्रयास और छोटे-छोटे अवसरों से भी बड़ा परिवर्तन संभव है।

समूह से जुड़ने के बाद उन्हें 30,000 की सीआईएफ राशि तथा 15,000 का बैंक ऋण प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहयोग के साथ अपनी बचत और मेहनत को जोड़कर उन्होंने अपने पति श्री राजू कुजूर के साथ मिलकर दोना-पत्तल निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। साथ ही उन्होंने सिलाई कार्य और कपड़ा दुकान का व्यवसाय भी शुरू किया।

धीरे-धीरे उनके उत्पादों की मांग बढ़ने लगी। स्थानीय दुकानदार और ग्राहक सीधे उनके घर से दोना-पत्तल खरीदने आने लगे। सामाजिक कार्यक्रमों, विवाह समारोहों एवं अन्य आयोजनों में भी उनके उत्पादों की मांग बढ़ी, जिससे व्यवसाय का विस्तार हुआ।

आज साधना कुजूर सिलाई, कपड़ा दुकान, दोना-पत्तल निर्माण और कृषि कार्य के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 15,000 से 16,000 की नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इस उपलब्धि ने उन्हें कोरिया जिले में ‘लखपति दीदी‘ के रूप में पहचान दिलाई है।

यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिले तो वे न केवल अपने परिवार की स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि समाज में भी एक प्रेरक उदाहरण बन सकती हैं। वे अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं  

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