बाजार समिति स्थित राज्य खाद्य निगम के गोदाम से 17 हजार पांच सौ जूट का बोरा गायब है। इससे विभाग सकते में हैं। इतनी संख्या में बोरा को चूहा कुतर नहीं सकता और ना ही घिसकर बर्बाद हो सकता है। इसलिए एसएफसी और गोदाम पदाधिकारी मौन हैं। क्योंकि उन्हें मार्च में ही प्रभार मिला है।
इसका खुलासा तब हुआ जब मिलर बोरा प्राप्त करने के लिए बाजार समिति परिसर स्थित गोदाम पर गया, तो मालूम हुआ कि कागज में बोरा को मिलर द्वारा उठाव किया जा चुका है। जबकि मिलर ने बोरा नहीं उठाने की बात कही। इससे एसएफसी कार्यालय में भी हड़कंप मच गया।
रिकॉर्ड से पता चला कि करीब 18 लाख रुपए का बोरा गायब है। उस समय के गोदाम के प्रभारी पदाधिकारी का स्थानांतरण दूसरे जिलों में हो गया है। मामला तूल ना पकड़ ले, विभाग डैमेज कंट्रोल में लग गया है।
संबंधित पदाधिकारी ने बताया कि रिकार्ड को ठीक किया जा रहा है। किसी मिलर की बोरा को दिक्कत नहीं होगी। गायब बोरा को सहकारिता कार्यालय ने चरपोखरी के मिलर को आवंटित किया था।
एसएफसी ने बाजार समिति परिसर स्थित गोदाम को मिलर को उपरोक्त जूट का बोरा निर्गत करने का निर्देश दिया, ताकि उन बोरा में सीएमआर चावल को भरकर गोदाम पर लाया जा सके।
नाम नहीं छापने की शर्त पर मिलर ने बताया कि मार्च माह में बोरा आवंटित किया गया था। बताते चलें कि मिलरों के पास पैक्सों के लिए आवंटित बोरा ही मिलता है।
पांच सौ जूट का बेल गोदाम से गायब
बिहार राज्य खाद्य निगम के गोदाम से पांच सौ बेल जूट का बोरा गायब है। एक बेल में पांच सौ जूट का बोरा होता है। एक बोरा की कीमत 72 रुपए बताई गई है। इसका खुलासा तब हुआ जब पैक्स अध्यक्षों ने विभाग से सीएमआर गिराने के लिए बोरे की मांग की।
मिलर ने बताया कि पदाधिकारी उन्हें जल्द बोरा का इंतजार करके देने का भरोसा दिया है। कहीं मामला तूल ना पकड़ ले। किसी से साझा करने से मना किया गया है।
सूत्रों ने बताया कि जिन दो गोदाम पदाधिकारी का स्थानांतरण दूसरे जिले में हो गया है, उन्हें बोरा इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, इस पर अधिकारी कुछ कहने को तैयार नहीं हैं।