ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी और किसानों के सच्चे साथी पशुधन को अब संक्रामक बीमारियों का डर नहीं सताएगा। जिले के लाखों बेजुबानों को खुरपका-मुंहपका जैसी घातक बीमारी से बचाने के लिए केंद्र सरकार के राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत छठे चरण का शंखनाद हो चुका है।
चिलचिलाती धूप और बढ़ती गर्मी के बीच पशुपालन विभाग की टीम गांव-गांव जाकर पशुओं को सुरक्षा का टीका लगा रही है।
विगत एक अप्रैल से शुरू हुए इस महाअभियान ने शुरुआती छह दिनों में ही बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिला पशुपालन पदाधिकारी की देखरेख में 6 अप्रैल तक जिले भर में 81,200 पशुओं का सफल टीकाकरण किया जा चुका है।
जिस रफ्तार से विभाग की टीम सुदूर गांवों और पहाड़ी क्षेत्रों में दस्तक दे रही है, उम्मीद है कि 8 अप्रैल की शाम तक यह आंकड़ा एक लाख की संख्या को पार कर जाएगा। विभाग का अंतिम लक्ष्य जिले के कुल 5,15,600 पशुओं को कवर करना है।
खुरपका-मुंहपका एक अत्यंत संक्रामक विषाणु जनित रोग है, जो गाय, भैंस और अन्य खुर वाले पशुओं को तेजी से अपनी चपेट में लेता है। इसमें पशु को तेज बुखार आता है, मुंह और जीभ पर छाले पड़ जाते हैं।
इसका कोई सटीक इलाज नहीं है, केवल टीकाकरण ही इससे बचने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है।