‘बौद्धिक बेईमानी’ का आरोप लगाना ठीक नहीं, निचली अदालत के जज को Supreme Court of India से राहत…

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा एक विशेष ट्रायल कोर्ट के जज के खिलाफ की गई तीखी टिप्पणियों को हटा दिया और कहा कि जज पर ‘बौद्धिक बेईमानी’ का आरोप लगाना पूरी तरह अनुचित था।

पाक्सो अधिनियम के मामलों से संबंधित इस विशेष अदालत ने यौन शोषण के एक मामले में एक आरोपित को दोषी ठहराया था।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया था और विशेष जज के खिलाफ तीखी टिप्पणियां की थीं कि उन्होंने बौद्धिक बेईमानी का संकेत दिया।

आरोपित को बरी करते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि विशेष जज और लोक अभियोजक ने बड़ी चूक की, जिससे आरोपित के साथ अन्याय हुआ। उसे तीन साल से ज्यादा समय जेल में डाल दिया गया। वास्तव में सहमति देने वाली पीड़िता वयस्क थी।

सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने विशेष जज द्वारा हाई कोर्ट के 17 दिसंबर, 2025 के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की। लोक अभियोजक की तरफ से भी एक अपील दाखिल की गई है।

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