क्या ऐसा संभव है? एक ही समय में महिला दो पुरुषों से गर्भवती, जुड़वां बच्चों के अलग-अलग पिता…

दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में एक महिला दो साल के जुड़वां बेटों का पितृत्व परीक्षण कराने के लिए कोलंबिया के नेशनल यूनिवर्सिटी की लेबोरेटरी ऑफ पॉपुलेशन जेनेटिक्स एंड आइडेंटिफिकेशन में गई। लैब ने उसका टेस्ट किया तो इसके नतीजे इतने चौंकाने वाले थे कि इसे पक्का करने के लिए फिर से टेस्ट किया गया लेकिन नतीजा वही निकला।

दरअसल, जुड़वां बच्चों की मां तो एक थी लेकिन पिता दो अलग-अलग पुरुष थे। बेहद की दुर्लभ दिखने वाला यह मामला 2018 का है। इसे हेटेरोपैटर्नल सुपरफेकंडेशन कहा जाता है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में अब तक ऐसे केवल 20 मामले ही सामने आए हैं।

ऐसा संभव है लेकिन आम जिंदगी में नहीं देखा गया

यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने बताया कि वे सैद्धांतिक रूप से तो जानते थे कि ऐसी कोई चीज संभव है, लेकिन उन्होंने असल जिंदगी में इसे पहले कभी नहीं देखा था। इसलिए, इस घटना ने तुरंत ही उनकी वैज्ञानिक जिज्ञासा को जगा दिया।

कैसे लगा पता?

पितृत्व की जांच करने के लिए कोलंबिया के नेशनल यूनिवर्सिटी के जेनेटिक्स संस्थान के वैज्ञानिक एक ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं जिसे ‘माइक्रोसेटेलाइट मार्कर’ कहा जाता है। इसमें बच्चे, मां और कथित पिता के डीएनए के छोटे-छोटे टुकड़ों की जांच की जाती है और फिर उनकी आपस में तुलना की जाती है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, हर व्यक्ति से डीएनए सैंपल लिए जाते हैं फिर 15 से 22 बिंदुओं की जांच की जाती है, जिन्हें माइक्रोसेटेलाइट कहा जाता है और फिर एक-एक करके उनकी तुलना की जाती है। यह प्रक्रिया डीएनए को माइक्रोस्कोप के नीचे रखकर देखने से कहीं ज्यादा जटिल है।

उंगली में हल्का सा छेद करके खून के नमूने लेने के बाद वैज्ञानिक एक रासायनिक प्रक्रिया अपनाते हैं ताकि खून के अन्य घटकों से डीएनए की बहुत थोड़ी सी मात्रा को अलग किया जा सके। जब बच्चे की आनुवंशिक प्रोफाइल का आधा हिस्सा मां से और बाकी आधा हिस्सा पिता से मेल खाता है तो पितृत्व की पुष्टि हो जाती है।

घटना जान वैज्ञानिक भी हैरान

कोलंबिया में इन जुड़वा बच्चों के मामले में वैज्ञानिकों ने मां, दोनों बच्चों और कथित पिता के डीएनए में 17 माइक्रोसेटेलाइट्स का विश्लेषण किया। लैब के डायरेक्टर का कहना है कि वह 26 साल से लैब के डायरेक्टर हैं लेकिन यह पहला मामला है जो पहले कभी नहीं देखा और यह अब तक एकमात्र मामला है।

इस तरह की घटना क्यों होती है?

2014 में अमेरिका के बाल्टीमोर में एक लैब के वैज्ञानिकों द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट से पता चला कि 39,000 पितृत्व परीक्षणों के एक डेटाबेस में से हेटरोपैटर्नल सुपरफेकंडेशन के केवल तीन मामले सामने आए।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में महिला के दो यौन साथी होते हैं। फिर वह महिला बहुत कम अंतराल में दोनों पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाती है तो इस तरह के मामले हो सकते हैं। इसके साथ ही पॉलीओव्यूलेशन भी होना चाहिए।

यहां जान लेना जरूरी है कि पॉलीओव्यूलेशन का मतलब है एक मासिक चक्र के दौरान दो या उससे अधिक अंडों का निकलना। फिर इन अंडों का फर्टिलाइज होना जरूरी है। कुल मिलाकर यह दुर्लभ घटनाओं का एक खेल है, जहां एक के बाद एक दुर्लभ घटनाएं होनी जरूरी हैं।

यह जानना भी जरूरी है कि अलग-अलग पिताओं से पैदा हुए जुड़वां बच्चे कभी भी आइडेंटिकल (एक जैसे दिखने वाले) नहीं हो सकते, क्योंकि आइडेंटिकल जुड़वां बच्चे एक ही अंडे और शुक्राणु से पैदा होते हैं।

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