मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग अब लोगों की नींद पर भारी पड़ने लगा है। देर रात तक स्क्रीन पर समय बिताने की आदत के कारण अनिद्रा, तनाव और मानसिक थकान जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इससे प्रभावित रोगी आयुष विश्वविद्यालय में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। पंचकर्म विभाग में शिरोधारा विधि से उनकी समस्या का समाधान किया जा रहा है।
महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के ओपीडी में पंचकर्म चिकित्सा होती है। यहां अनिद्रा, सिरदर्द सहित अन्य समस्याओं से पीड़ित की संख्या महीने में 10- 12 होती थी।
वहीं अब प्रतिदिन बढ़कर दो से तीन हो गई है। चिकित्सीय जांच के बाद ऐसे रोगियों का शिरोधारा विधि से उपचार किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार यह समस्या युवाओं और कामकाजी वर्ग में अधिक देखने को मिल रही है।
आयुर्वेद चिकित्सक डा. लक्ष्मी अग्निहोत्री ने बताया कि मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी शरीर में नींद नियंत्रित करने वाले हार्मोन को प्रभावित करती है।
देर रात तक मोबाइल का उपयोग मस्तिष्क को सक्रिय बनाए रखता है, जिससे नींद आने में कठिनाई होती है और धीरे-धीरे अनिद्रा की समस्या गंभीर रूप ले लेती है।
शिरोधारा आयुर्वेद की प्राचीन पंचकर्म चिकित्सा पद्धति है, जिसमें औषधीय तेल को माथे पर प्रवाहित किया जाता है। इस प्रक्रिया से मस्तिष्क की नसों को शांति मिलती है और तंत्रिका तंत्र संतुलित होता है।
चिकित्सकों का कहना है कि यह विधि प्राकृतिक नींद लाने, मानसिक तनाव कम करने और सिरदर्द से राहत देने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है।
नियमित रूप से शिरोधारा उपचार लेने वाले रोगियों में नींद की गुणवत्ता सुधरी है। इसके साथ ही माइग्रेन, उच्च रक्तचाप, बाल झड़ना, त्वचा विकार और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं में भी लाभ मिल रहा है।
चिकित्सक कहना है कि शिरोधारा जैसी चिकित्सा प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में ही करानी चाहिए। उपचार के बाद पर्याप्त विश्राम और संतुलित आहार का पालन करना आवश्यक होता है, तभी इसका पूर्ण लाभ मिल पाता है।