विदेशों में पढ़ने जाने वाले छात्रों को देश में उच्च शिक्षा के बेहतर विकल्प मुहैया कराने सहित दुनिया भर के छात्रों के लिए देश को विश्वस्तरीय शिक्षा का बड़ा केंद्र बनाने की योजना को शिक्षा मंत्रालय ने सोमवार को पचास से अधिक देशों के राजनयिकों के साथ साझा किया।
साथ ही बताया कि भारत में अब तक 19 शीर्ष विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खोलने की अनुमति दी जा चुकी है।
इस महीने में अमेरिका, इटली, यूनाइटेड किंगडम व आस्ट्रेलिया के पांच विश्वविद्यालयों को इसकी अनुमति दी गई है। इनमें यूनाइटेड किंगडम के तीन बड़े विश्वविद्यालयों को गुजरात के गिफ्ट सिटी में कैंपस खोलने की अनुमति दी गई है।
भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाने की योजना साझा की
शिक्षा मंत्रालय की ओर से आयोजित स्टडी इन इंडिया एजुकेशन डिप्लोमैटिक कान्क्लेव-2026 में शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान ने उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में चल रहे प्रयासों को साझा किया।
साथ ही बताया कि उनका फोकस शिक्षा की गुणवत्ता, नवाचार और उच्च शिक्षा को सबकी पहुंच में रखने की ओर है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका जीवंत ज्ञान तंत्र, बड़ी युवा आबादी का होना और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
देश में मौजूदा समय में कुल आबादी का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा 35 साल से कम उम्र के लोगों का है। ऐसे में देश के सामने चुनौती इन्हें उच्च शिक्षा से जोड़ने की है।
साथ ही उच्च शिक्षा के लिए इनके विदेशों में होने वाले पलायन को भी रोकने की है।