ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के पहले दिन भारत ने सदस्य देशों की साझा चिंताओं को प्रमुखता से उठाते हुए स्पष्ट कहा कि स्थिरता चुनिंदा नहीं हो सकती और शांति भी टुकड़ों-टुकड़ों में स्थापित नहीं की जा सकती।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते खतरे और वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं पर चिंता जताते हुए मनमाने प्रतिबंधों और दबाव की राजनीति की भी आलोचना की।
अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान होना चाहिए- जयशंकर
भारत मंडपम में गुरुवार को आयोजित बैठक में जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान, आम नागरिकों की सुरक्षा और अस्पतालों, स्कूलों तथा बिजली-पानी जैसी सार्वजनिक सुविधाओं को निशाना बनाए जाने से बचना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने के हर रचनात्मक प्रयास का समर्थन करेगा। विदेश मंत्री ने एकतरफा प्रतिबंधों और दबाव की राजनीति की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप न होने वाले प्रतिबंध विकासशील देशों की प्रगति को प्रभावित करते हैं।
माना जा रहा है कि उनका इशारा रूस और ईरान जैसे देशों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों की ओर था, जिनका असर भारत सहित कई विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है।
टुकड़ों में शांति स्थापित नहीं हो सकती : जयशंकर
जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, समुद्री यातायात पर खतरे और ऊर्जा ढांचे में व्यवधान ने स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में निर्बाध और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
उन्होंने गाजा की मानवीय स्थिति को गंभीर बताते हुए स्थायी युद्धविराम, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच और शांतिपूर्ण समाधान के लिए विश्वसनीय प्रक्रिया शुरू करने की आवश्यकता दोहराई। भारत ने एक बार फिर फलस्तीन मुद्दे पर ‘द्वि-राष्ट्र समाधान’ के समर्थन की अपनी नीति स्पष्ट की।
पीएम मोदी से भी मिले ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्री बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, रूस के सर्गेई लावरोव, ब्राजील के माउरो विएरा, इंडोनेशिया के सुगियोनो और दक्षिण अफ्रीका के रोनाल्ड लामोला सहित कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी की अनुपस्थिति में भारत में चीन के राजदूत शू फेईहोंग ने हिस्सा लिया। विदेश मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात की। पीएम मोदी और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच हुई बैठक को लेकर पीएमओ ने एक्स पर एक पोस्ट साझा की। वहीं, ईरानी दूतावास ने मोदी और अराघची की बैठक के संबंध में एक्स पर जानकारी दी।
आतंकवाद पर हो जीरो टालरेंस की नीति: जयशंकर
जयशंकर ने लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया की चुनौतियां बताईं विदेश मंत्री जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति अपनाने की अपील की और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सरीखे बहुस्तरीय प्रणाली में सुधार की तत्काल जरूरत पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद लगातार अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा बना हुआ है। किसी भी तरह के आतंकवाद को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने सीमा पार आतंकवाद की निंदा करते हुए कहा कि यह राष्ट्रों के बीच संबंधों को नियंत्रित करने वाले मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। इसके प्रति जीरो टालरेंस और एक अटल और सार्वभौमिक मानदंड बना रहना चाहिए।
जयशंकर ने बहुपक्षीय संस्थाओं, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र की कमजोर होती स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन बहुपक्षीय व्यवस्था कमजोर पड़ती जा रही है और संयुक्त राष्ट्र की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है।
जयशंकर ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि बहुपक्षवाद सुधार की जरूरत पहले से अधिक बढ़ गई है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सुधार की मांग दोहराई।
विदेश मंत्री ने कहा कि सुधार में लगातार हो रही देरी की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।विदेश मंत्री ने लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया की चुनौतियों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि विकासशील देशों के लिए स्थिरता और समाधान सुनिश्चित करने में ब्रिक्स की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
बता दें कि ब्रिक्स समूह की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हुई थी। वर्ष 2024 में इसमें मिस्त्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हुए, जबकि 2025 में इंडोनेशिया सदस्य बना।
वर्तमान में यह समूह दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, करीब 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी और लगभग 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है।