हत्या जैसे गंभीर अपराधों में नाबालिगों पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाने का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अगर कानूनी शर्तें पूरी होती हैं तो हत्या के आरोपित नाबालिग पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जा सकता है, क्योंकि किशोर न्याय कानून के तहत ऐसा अपराध जघन्य अपराध की श्रेणी आता है।

जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने यह टिप्पणी एक नाबालिग की अपील को खारिज करते हुए की। उसने पटना हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसमें एक लड़के की हत्या के मामले में उस पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई थी।

हत्या के आरोपी नाबालिगों पर बालिगों जैसा मुकदमा संभव

नाबालिगों पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाने के कानूनी ढांचे को स्पष्ट करने के उद्देश्य से दिए गए इस फैसले में कहा गया कि हत्या (आइपीसी की धारा 302) को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) अधिनियम, 2015 के तहत जघन्य अपराध माना जाना चाहिए।

यह फैसला 16 वर्षीय किशोर की ओर से दाखिल अपील पर आया है, जिसने बिहार में कथित रूप से एक लड़के की गर्दन काट दी थी।

हाई कोर्ट ने कहा था कि अपीलकर्ता पर एक बालिग के तौर पर मुकदमा चलाने की आवश्यकता है और इसी के अनुसार, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को इस मामले को नियमित अदालत में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था।

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