शिपिंग मंत्रालय ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण, उस क्षेत्र में जाने वाले माल के लिए शिपिंग भाड़ा शुल्क में भारी बढ़ोतरी हुई है। कंटेनरों के मामले में यह शुल्क लगभग दस गुना बढ़ गया है, जबकि LPG और कच्चे तेल के लिए दरें दोगुनी से भी ज्यादा हो गई हैं।
जहां एक ओर, युद्ध से पहले LPG के लिए औसत समुद्री भाड़ा शुल्क 94 डॉलर प्रति टन था, जो 15 मई तक बढ़कर लगभग 207 डॉलर प्रति टन हो गया है।
वहीं दूसरी ओर, कच्चे तेल का भाड़ा शुल्क 14 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 28.6 डॉलर प्रति टन हो गया है। कंटेनरों के लिए, भाड़ा शुल्क बढ़कर 2,000 डॉलर प्रति ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट (TEU) हो गया है, जबकि संघर्ष से पहले यह 203 डॉलर था।
क्षेत्र में खतरा बढ़ने से हुई बढ़ोतरी
शुल्क में हुई इस वृद्धि का कारण क्षेत्र में मौजूद अनिश्चितता और बढ़े हुए जोखिमों के कारण हुई है। पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, शिपिंग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने कहा कि मंत्रालय इन दरों पर बारीकी से नजर रख रहा है और उसने शिपिंग कीमतों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के संबंध में एक परामर्श (advisory) जारी किया है।
जानकारी के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से, भारतीय बंदरगाहों से पश्चिम एशिया के लिए औसत मासिक शिपिंग सेवाओं में भारी गिरावट आई है।
जहां पहले 444 जहाजों का आवागमन होता था, वहीं अब यह संख्या घटकर मात्र 125 रह गई है। आंकड़ों से पता चलता है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से LPG के मामले में समुद्री भाड़ा शुल्क लगातार बढ़ रहा है।
जबकि कच्चे तेल और कंटेनरों के मामले में, दरें अप्रैल के अंत में अपने चरम पर पहुंच गई थीं। 15 मई तक इन दरों में थोड़ी नरमी देखने को मिली है। एक अधिकारी ने कहा, “स्थिति लगातार बदल रही है और हम घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। जब यह संघर्ष समाप्त हो जाएगा, तब भाड़ा शुल्क में भी कमी आएगी।”