केंद्र और प्रदेश सरकार बेशक महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है और लगातार कार्यक्रम संचालित कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारी इसके विपरीत काम कर रहे हैं। आलम यह है कि जहां मरीजों की संख्या अधिक है वहां चिकित्सक कम है और जहां मरीजों की संख्या कम है वहां चिकित्सकों की भरमार है।
जिला स्वास्थ्य समिति के समक्ष रखी गई रिपोर्ट के अनुसार जिला महिला अस्पताल में केवल पांच चिकित्सक तैनात है। एक चिकित्सक औसतन प्रतिदिन 121 मरीज देख रही है। वहीं पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डासना में 12 चिकित्सक तैनात है। यहां एक चिकित्सक औसतन प्रतिदिन 43 मरीज देख रहे है।
सीएचसी लोनी में भी 12 चिकित्सक मरीजों की देखभाल कर रहे हैं। एक चिकित्सक औसतन प्रतिदिन 116 मरीज देख रहे हैं। डूंडा हेडा में बनाए गए संयुक्त अस्पताल में केवल छह चिकित्सक कार्यरत है लेकिन यहां मरीजों की संख्या भी कम है। एक चिकित्सक औसतन प्रतिदिन 46 मरीज ही देख रहे हैं।
सीएचसी मुरादनगर में 10 चिकित्सक तैनात है और यहां औसतन एक चिकित्सक प्रतिदिन 85 मरीज देख रहे हैं। भोजपुर में पांच चिकित्सक तैनात हैं और एक चिकित्सक औसतन प्रतिदिन 76 मरीज देख रहे हैं। सीएचसी बम्हेटा में छह चिकित्सक कार्यरत हैं। एक चिकित्सक औसतन प्रतिदिन 29 मरीज ही देख रहे हैं।
औसतन प्रतिदिन 118 मरीज देख रहे
जिला एमएमजी अस्पताल में 21 चिकित्सक तैनात हैं। एक चिकित्सक औसतन प्रतिदिन 118 मरीज देख रहे हैं। संयुक्त अस्पताल में 10 चिकित्सक तैनात हैं।एक चिकित्सक औसतन प्रतिदिन 97 मरीज देख रहे हैं। लोनी के संयुक्त अस्पताल में आठ चिकित्सक तैनात है। यहां एक चिकित्सक औसतन प्रतिदिन 83 मरीज देख रहे हैं।
नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सबसे अधिक 48 चिकित्सक तैनात है।एक चिकित्सक औसतन प्रतिदिन 95 मरीज देख रहे हैं। शहरी क्षेत्र में संचालित 82 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर 82 चिकित्सक तैनात है।एक चिकित्सक औसतन प्रतिदिन 52 मरीज देख रहे हैं।