भारत में रह रही पोलैंड की कंटेंट क्रिएटर एग्निएस्का हड्डा का एक सोशल मीडिया पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो पोस्ट में महिला ने जलवायु संकट को लेकर पश्चिमी मीडिया और वैश्विक सोशल मीडिया यूजर्स के दोहरे मापदंड की धज्जियां उड़ाई हैं।
दरअसल, कंटेंट क्रिएटर एग्निएस्का हड्डा ने सवाल उठाया है कि जब यूरोप में 35 डिग्री तापमान होने पर स्कूल बंद हो जाते हैं और लोग पार्कों या समुद्र तटों पर सोते हैं, तो पूरी दुनिया उनके प्रति सहानुभूति दिखाती है।
लेकिन जब भारत में तापमान 40 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है और भारतीय इस गर्मी से बचने के लिए खुले में सोते हैं तो विदेशी मीडिया उनका जमकर मजाक उड़ाती है और भारत को पिछड़ा देश बताती है।
उपहास केवल भारत के लिए ही
उन्होंने वीडियो में पूछा, “सहानुभूति पश्चिम के लिए ही क्यों आरक्षित है जबकि उपहास केवल भारत के लिए ही?” एग्निएस्का ने आगे कहा कि आलोचना वहां करें जहां सही हो, लेकिन भारत की उपलब्धियों का सम्मान करना भी जरूरी है।
बता दें कि कंटेंट क्रिएटर एग्निएस्का ने यह वीडियो अपने अपने गृह देश पोलैंड की यात्रा के दौरान रिकॉर्ड किया, जहां इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, यह पहले देश में दुर्लभ माना जाता था।
उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी के स्कूल बंद हो गए हैं, बाहरी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ गया है। सड़कों और रेलवे ट्रैक के पिघलने और बिजली व्यवस्था पर बढ़ते दबाव की खबरें आ रही हैं।
यूरोप के कई घरों में नहीं है सीलिंग फैन
उन्होंने यह भी बताया कि यूरोप में कई घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनिंग या यहां तक कि सीलिंग फैन भी नहीं हैं, जिससे गर्मी सहन करना और भी मुश्किल हो जाता है।
यूरोपीय देशों की भारत से की तुलना
एग्निएस्का ने इस गर्मी की तुलना भारत से करते हुए कहा, यहां यूरोपीय देशों में जिस 35 डिग्री तापमान पर लोगों की हालत खराब है, उस 35 डिग्री तापमान को भारत में सामान्य माना जाता है। वहां गर्मियों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होना आम बात है और कुछ क्षेत्रों में तो यह 50 डिग्री तक भी पहुंच जाता है।
फिर भी, जब भी भारत किसी चुनौती का सामना करता है, विदेशी मीडिया तुरंत भारत को ‘पिछड़ा’ कहने लगता है। लेकिन आज, वे सुर्खियां कहां हैं?
मुंबई की घटना का किया जिक्र
वीडियो में आगे एग्निएस्का ने मुंबई के वर्सोवा बीच पर बिजली गुल होने के दौरान खुले में सो रहे लोगों की वायरल तस्वीरों का बचाव करते हुए कहा कि गर्मी से बचने की कोशिश करने वाले भारतीयों का व्यापक रूप से उपहास किया गया।
उन्होंने कहा, “याद है जब बिजली कटौती के दौरान वर्सोवा बीच या पार्कों में सोते हुए भारतीयों की तस्वीरें पूरी दुनिया में वायरल हुई थीं? वे मीम्स बन गईं, मजाक बन गईं। भारत का उपहास उड़ाया गया।
आज, यूरोप के कई हिस्सों में लोग समुद्र तटों और पार्कों की घास पर रातें बिता रहे हैं क्योंकि यही उनके पास सबसे सस्ता एयर कंडीशनिंग विकल्प है। इस बार, दुनिया उनका उपहास नहीं उड़ा रही है, बल्कि उनके प्रति सहानुभूति दिखा रही है। और सहानुभूति ही वह चीज है जिसके हर इंसान हकदार है।”
उन्होंने निष्कर्ष निकालते हुए कहा, “भारत की आलोचना वहीं करें जहां आलोचना उचित हो, लेकिन भारत की उपलब्धियों का जश्न भी उतने ही आत्मविश्वास के साथ मनाएं। क्योंकि अगर हम अपने देश का सम्मान नहीं करेंगे, तो कोई और भी नहीं करेगा।”