ऐसा बहुत कम होता है जब बेहद शालीन और शांत रहने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु किसी पर गुस्सा हो जाएं।
लेकिन शनिवार को बंगाल में दार्जिलिंग जिले के अधीन सिलीगुड़ी में उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम लेकर नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने तो यहां तक आरोप लगाया कि आदिवासियों को उनके कार्यक्रम में शामिल होने से रोका गया। वह विश्व आदिवासी सम्मेलन में शामिल होने आईं थीं।
वह इस बात से भी नाराज दिखीं कि उनके दौरे पर प्रोटोकाल का पालन तक नहीं हुआ। उनके स्वागत कि लिए राज्य सरकार का कोई मंत्री तक नहीं था। सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देव ने उनका स्वागत किया।
‘पता नहीं मुझसे क्यों नाराज हैं ममता’
प्रोटोकाल के अनुसार इस मौके पर मुख्यमंत्री या राज्य के किसी मंत्री को उपस्थित होना चाहिए था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट कर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि तृणमूल सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि टीएमसी सरकार ने प्रोटोकाल की घोर अवहेलना करते हुए भारत के राष्ट्रपति का अपमान करके अपनी अराजक हरकतों की नई हद पार कर दी है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन हैं। पर पता नहीं मुझसे नाराज क्यों हैं।
कार्यक्रम में गिनती के लोग थे मौजूद
उन्होंने कार्यक्रम स्थल बदलने, लोगों की कम उपस्थिति और स्वागत में कमी को लेकर स्पष्ट तौर पर असंतोष जताया। पहले यह कार्यक्रम सिलीगुड़ी के बिधाननगर में प्रस्तावति था।
बाद में सुरक्षा कारणों और अन्य प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बागडोगरा हवाईअड्डे के पास आयोजित हुआ। राष्ट्रपति जब पहुंचीं तो यहां गिनती के ही लोग थे।
राष्ट्रपति मुर्मु ने जताई नाराजगी
गोसाईंपुर में कार्यक्रम खत्म होने के बाद राष्ट्रपति मुर्मु बिधाननगर पहुंचीं। यहां आदिवासी समुदाय का एक अन्य समारोह चल रहा था। यहीं उन्होंने खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
कहा कि यदि कार्यक्रम बिधाननगर में होता तो अधिक लोग आते और कोई समस्या नहीं होती। पता नहीं राज्य प्रशासन ने वहां कार्यक्रम की अनुमति क्यों नहीं दी। शायद राज्य सरकार आदिवासियों का भला नहीं चाहती, इसलिए उन्हें आने से रोका गया।
मामले को लेकर राजनीति शुरू
दूसरी ओर, इसको लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने है। दार्जिलिंग के सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू बिष्ट कार्यक्रम में राष्ट्रपति के साथ थे।
कार्यक्रम खत्म होते ही उन्होंने राज्य की तृणमूल सरकार और मुख्यमंत्री ममता पर हमला बोला। कहा कि सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति का अपमान हुआ है।
मुख्यमंत्री ममता ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘भाजपा संविधान को किस स्तर पर ले गई है, यह कहने में भी अब लज्जा आती है। वह अपनी राजनीति बेचने के लिए राष्ट्रपति को बंगाल भेज रही है।’
“पता नहीं मुझसे क्यों नाराज़ हैं?” ममता बनर्जी के ‘राजनीति’ वाले बयान पर राष्ट्रपति मुर्मु का तंज…
ऐसा बहुत कम होता है जब बेहद शालीन और शांत रहने वाली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु किसी पर गुस्सा हो जाएं।
लेकिन शनिवार को बंगाल में दार्जिलिंग जिले के अधीन सिलीगुड़ी में उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम लेकर नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने तो यहां तक आरोप लगाया कि आदिवासियों को उनके कार्यक्रम में शामिल होने से रोका गया। वह विश्व आदिवासी सम्मेलन में शामिल होने आईं थीं।
वह इस बात से भी नाराज दिखीं कि उनके दौरे पर प्रोटोकाल का पालन तक नहीं हुआ। उनके स्वागत कि लिए राज्य सरकार का कोई मंत्री तक नहीं था। सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देव ने उनका स्वागत किया।
‘पता नहीं मुझसे क्यों नाराज हैं ममता’
प्रोटोकाल के अनुसार इस मौके पर मुख्यमंत्री या राज्य के किसी मंत्री को उपस्थित होना चाहिए था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी एक्स पर पोस्ट कर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि तृणमूल सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि टीएमसी सरकार ने प्रोटोकाल की घोर अवहेलना करते हुए भारत के राष्ट्रपति का अपमान करके अपनी अराजक हरकतों की नई हद पार कर दी है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि ममता बनर्जी मेरी छोटी बहन हैं। पर पता नहीं मुझसे नाराज क्यों हैं।
कार्यक्रम में गिनती के लोग थे मौजूद
उन्होंने कार्यक्रम स्थल बदलने, लोगों की कम उपस्थिति और स्वागत में कमी को लेकर स्पष्ट तौर पर असंतोष जताया। पहले यह कार्यक्रम सिलीगुड़ी के बिधाननगर में प्रस्तावति था।
बाद में सुरक्षा कारणों और अन्य प्रशासनिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बागडोगरा हवाईअड्डे के पास आयोजित हुआ। राष्ट्रपति जब पहुंचीं तो यहां गिनती के ही लोग थे।
राष्ट्रपति मुर्मु ने जताई नाराजगी
गोसाईंपुर में कार्यक्रम खत्म होने के बाद राष्ट्रपति मुर्मु बिधाननगर पहुंचीं। यहां आदिवासी समुदाय का एक अन्य समारोह चल रहा था। यहीं उन्होंने खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
कहा कि यदि कार्यक्रम बिधाननगर में होता तो अधिक लोग आते और कोई समस्या नहीं होती। पता नहीं राज्य प्रशासन ने वहां कार्यक्रम की अनुमति क्यों नहीं दी। शायद राज्य सरकार आदिवासियों का भला नहीं चाहती, इसलिए उन्हें आने से रोका गया।
मामले को लेकर राजनीति शुरू
दूसरी ओर, इसको लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने है। दार्जिलिंग के सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजू बिष्ट कार्यक्रम में राष्ट्रपति के साथ थे।
कार्यक्रम खत्म होते ही उन्होंने राज्य की तृणमूल सरकार और मुख्यमंत्री ममता पर हमला बोला। कहा कि सिलीगुड़ी में राष्ट्रपति का अपमान हुआ है।
मुख्यमंत्री ममता ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘भाजपा संविधान को किस स्तर पर ले गई है, यह कहने में भी अब लज्जा आती है। वह अपनी राजनीति बेचने के लिए राष्ट्रपति को बंगाल भेज रही है।’