महानगर के तिलजला इलाके के जी जे खान रोड पर दो इमारतों को गिराने के लिए तैनात एक पेलोडर को शुक्रवार सुबह स्थानीय लोगों के साथ करीब छह घंटे तक चले गतिरोध के बाद पीछे हटना पड़ा।
वजह थी -ध्वस्तीकरण स्थल के सामने स्थित मस्जिद में नमाजियों को जुमे की नमाज पढ़ने के लिए जगह चाहिए थी।
पुलिस और निवासियों में हुई नोंकझोंक
पेलोडर हटते ही विस्थापित निवासी, जिनके आशियाने को कोलकाता नगर निगम ने अवैध बताकर गिराने के लिए चिह्नित किया था, खाली जगह पर घुटने टेककर नमाज पढ़ने बैठ गए।
तालिखोला मस्जिद गिराई जा रही इमारतों के ठीक सामने स्थित है। नमाज के बाद बैरिकेड फिर से लगा दिए गए और सड़क पर आवाजाही रोक दी गई।
एक स्थानीय ने बताया, “हमारे इलाके को बैरिकेड लगाकर घेर दिया गया है और जहां हमारी मस्जिद है, उस सड़क पर किसी को जाने नहीं दिया जा रहा।
सुबह से हम अधिकारियों और पुलिस से पेलोडर हटाने की मिन्नत कर रहे थे ताकि हम नमाज के लिए जगह का इस्तेमाल कर सकें। आखिरकार पुलिस मान गई, पेलोडर हटा दिया गया और जुमे की नमाज के लिए बैरिकेड अस्थायी रूप से हटा दिए गए।
मौके पर मौजूद एक अधिकारी ने कहा कि निगम के पेलोडर को काम पूरा होने के बाद वापस ले जाया गया। यहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
नमाज के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू हुई। निगम ने शुक्रवार को इमारतें खाली करने का नोटिस भी चिपकाया था । जैसे ही मजदूर हथौड़ों से कंक्रीट तोड़ने लगे, इलाके में तनाव फ़ैल गया।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि विस्थापित लोगों को वैकल्पिक आवास दिया जाए और घरों को जबरन खाली न कराया जाए और न गिराया जाए।
पुलिस और केंद्रीय बल के जवानों ने स्थिति नियंत्रण में रखने के लिए कुछ स्थानीय लोगों की मदद ली। भीड़ के उग्र होने पर दोपहर करीब 2:45 बजे ध्वस्तीकरण का काम रोक दिया गया। पुलिस ने दोनों आंशिक रूप से ध्वस्त इमारतों के प्रवेश द्वार को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया।
स्थानीय लोगों ने माना कि इलाके में अवैध निर्माण हुए हैं, लेकिन सवाल उठाया कि रहने वालों को खाली करने के लिए पर्याप्त समय क्यों नहीं दिया गया।
स्थानीय नूरुल इस्लाम, जिन्होंने पुलिस को भीड़ संभालने में मदद की, ने कहा, यहां ज्यादातर इमारतें अवैध हैं और अगर प्रशासन इन्हें गिराने का फैसला करता है तो इसमें गलत नहीं है।
हमारा कहना है कि वहां रहने वालों को इतना कम समय क्यों दिया गया? हम प्रशासन से अनुरोध करते हैं कि किराए पर दूसरा घर ढूंढने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।”
विस्थापित निवासी समीना बीबी ने कहा, “मेरा परिवार अब एक रिश्तेदार की मेहरबानी पर है क्योंकि हमारे किराए के फ्लैट की छत तोड़ दी गई है।
हमें अपने आंशिक रूप से टूटे घर के पास भी नहीं जाने दिया जा रहा। हम इस अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी है, लेकिन हमारा जो आशियाना टूट चुका है, वो वापस नहीं मिलेगा।”
एक अन्य विस्थापित किरायेदार रुकैया बेगम ने कहा, हम गुरुवार तड़के जल्दी में फ्लैट छोड़कर निकले और अपने बर्तन और कपड़े भी नहीं ले पाए।