सेक्टर छह स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र में महाजन इमेजिंग लैब का शनिवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि डिफ़ेंस सेक्टर के साथ-साथ हेल्थ सेक्टर को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता है। तकनीक का जितना विस्तार होगा, हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ेगी। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि वर्ष 2050 तक अस्पतालों पर बोझ अत्यधिक बढ़ सकता है।
हेल्थ सेक्टर का विस्तार और प्रिवेंटिव केयर की आवश्यकता
केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा, “मुझे आज तक रेडियोलॉजी क्षेत्र से कोई शिकायत नहीं मिली है। आज भारत के सामने अनोखी चुनौतियां हैं, और सरकार देश की बड़ी आबादी तक स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गतिशील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। प्रदेश के 75 ज़िलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है और एमबीबीएस की सीटें बढ़ाई गई हैं। उन्होंने ‘प्रिवेंटिव हेल्थ’ (बीमारी से पूर्व बचाव) को भविष्य के लिए सबसे सफल माध्यम बताया।
‘अभी से प्रिवेंटिव हेल्थ पर ध्यान जरूरी’
शुगर, फैटी लिवर और ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियां गंभीर बीमारियों के शुरुआती लक्षण हैं। महंगे इलाज और डायलिसिस से मरीजों को राहत देने के लिए प्रधानमंत्री और पूरी सरकार निरंतर प्रयासरत है। भारत युवाओं का देश है; यदि हमने अभी स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया, तो वर्ष 2050 तक अस्पतालों पर बोझ अत्यधिक बढ़ सकता है। इसीलिए हमें अभी से बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक रहना होगा।
डायग्नोस्टिक लैब्स का महत्व और हेल्थ सिक्योरिटी
डॉ. हर्ष महाजन और डॉ. ऋतु महाजन का आभार व्यक्त करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया और लोगों का खान-पान बदल रहा है, बीमारियाँ भी बढ़ रही हैं। ऐसे में बीमारियों की समय पर पहचान होना बेहद आवश्यक है। ऐसी लैब्स स्वास्थ्य सुरक्षा (Health Security) के लिए रक्षा कवच का काम करती हैं।
जब देश में आधुनिक रेडियोलॉजी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, तब डॉ. महाजन ने इस क्षेत्र में दिशा दिखाई। कई बार मरीज़ अपनी बीमारी ठीक से नहीं बता पाते और भाषा की बाधा आड़े आती है; ऐसी स्थिति में सटीक और त्वरित डायग्नोसिस के लिए ये लैब्स बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बनाम मानवीय संवेदना
उन्होंने आगे कहा कि चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स का उपयोग अच्छा है, लेकिन यह एक चुनौती भी पेश करता है। अक्सर इंटरनेट पर किसी सामान्य दर्द के बारे में पूछने पर वह स्थिति को अत्यधिक गंभीर बता देता है, जिससे मरीज घबरा जाते हैं। आज मेडिकल टेक्नोलॉजी ने बहुत प्रगति कर ली है, मगर इंसान के मन और भावनाओं को समझने के लिए अब तक कोई मशीन नहीं बनी है। मशीनें केवल शारीरिक जाँच और इलाज कर सकती हैं, लेकिन एक डॉक्टर ही मरीज़ के मन और उसकी वास्तविक स्थिति को संवेदनशीलता से समझ सकता है।