क्या ईरान ने लंबी लड़ाई की तैयारी कर ली है? जंग के बीच उठाया अमेरिका-इज़रायल की नींद उड़ा देने वाला कदम…

28 फरवरी, 2026 को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच की जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। उम्मीद के उलट ईरान लगातार पलटवार कर रहा है। उसने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर सख्त पहरेदारी करके दुनिया में ईंधन का संकट पैदा कर दिया है। तेल वाले जहाजों को यहां से गुजरने की मनाही है। सिर्फ चुनिंदा जहाज ही गुजर रहे हैं और वह भी ईरान की मर्जी से।

इस बीच ईरान ने कुछ और कार्गो जहाजों को गुजरने की इजाजत दी है। इन कार्गो जहाजों पर खाद्यान और अन्य कृषि पदार्थ लदे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस जंग के बीच वह अपने देश में फूड सप्लाई को सुरक्षित रखना चाहता है। अगर यह जंग लंबी खिंचती है तो ईरान में भुखमरी के हालात पैदा न हों।

अनाज और बीजों के आयात पर निर्भर ईरान

मरीन ट्रैकिंग डेटा के आंकड़ों के मुताबिक, 15 और 16 मार्च के दौरान कम से कम 6 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे हैं। इन सभी ने उत्तरी खाड़ी के बेहद महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्र, ईरान के इमाम खुमैनी पोर्ट पर माल उतारा है।

9 मार्च के बाद से बंदरगाह पर माल उतारने के बाद 5 अन्य जहाज भी होर्मुज से होकर गुजरे हैं। इन सभी ने वैकल्पिक शिपिंग लेन का इस्तेमाल किया। इन जहाजों में एक पर कनाडाई सोयाबीन ले जाई गई। इन जहाजों के आने का मतलब है कि ईरान घरेलू खाद्य आपूर्ति जारी रखना चाहता है।

यहां जान लेना यह भी जरूरी है कि ईरान अपनी खाद्य जरूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा खुद पैदा करता है। हालांकि अनाज और तेल बीजों को वह आयात करता है। इनका इस्तेमाल खाने के तेल और पशु चारे के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

अनाज का भंडारण करने पर जोर

इसके अलावा, ईरान हर साल लगभग 1.5 मिलियन टन मक्का का उत्पादन करता है और ब्राजील से 8 से 10 मिलियन टन तक का आयात भी करता है। खेती इस देश के लिए परेशानी वाली बात है।

वजह है पानी की कमी और यही यहां के किसानों की बड़ी समस्या है। जंग से पहले ही ईरान ने करीब 4 मिलियन टन गेंहूं का भंडारण कर लिया था। यह उसकी 4 महीने की जरूरतों को पूरा कर सकता है।

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