हम अक्सर ऐसे लोगों को बहुत जल्द ‘ज्यादा भावुक’ या ‘सेंसिटिव’ होने का टैग दे देते हैं, जो छोटी-छोटी बातों पर बहुत ज्यादा रिएक्ट करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे कोई मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्या भी हो सकती है?
देहरादून स्थित कैलाश अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन, डॉ. गोपाल जी शर्मा के अनुसार, बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर मूड स्विंग्स या किसी के खराब दिन होने तक सीमित नहीं है। यह एक गंभीर मानसिक स्थिति है, जो इस बात को प्रभावित करती है कि व्यक्ति अपनी भावनाओं को कैसे संभालता है, दूसरों के साथ कैसे पेश आता है और खुद को किस नजरिए से देखता है।
इस आर्टिकल में हम BPD के कुछ ऐसे छिपे हुए संकेतों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आपको कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
भावनाओं का भारी उतार-चढ़ाव
लोग अक्सर इस बीमारी के सबसे अहम संकेत पर ध्यान नहीं दे पाते, जो है भावनाओं की तीव्रता। बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति के मूड में अचानक इतने तेज बदलाव आ सकते हैं जिन्हें संभालना उनके लिए नामुमकिन सा लगता है।
एक पल में वे बिल्कुल खुश और सामान्य नजर आ सकते हैं, और अगले ही पल उन्हें गहरी चोट, गुस्सा या अंदर से खालीपन महसूस हो सकता है।
रिजेक्शन का डर
इस डिसऑर्डर से जूझ रहे लोगों के मन में हमेशा यह गहरा डर बना रहता है कि कोई उन्हें छोड़कर न चला जाए। रोजमर्रा की आम जिंदगी में भी, अगर उन्हें जरा सा भी लगता है कि कोई उन्हें नजरअंदाज कर रहा है, उन्हें ठुकरा रहा है या उन्हें अकेला छोड़ रहा है, तो वे बुरी तरह घबरा जाते हैं।
उथल-पुथल भरे रिश्ते
BPD का सीधा असर रिश्तों पर भी पड़ता है, जिससे उनके रिश्ते कभी स्थिर नहीं रह पाते। वे पल भर में किसी को अपना सब कुछ या आदर्श मान लेते हैं और अचानक उसी व्यक्ति से उन्हें गहरी निराशा या गुस्सा महसूस होने लगता है।
परिणामों की परवाह किए बिना काम करना
बिना सोचे-समझे कोई भी कदम उठा लेना इस स्थिति का एक और बड़ा लक्षण है। व्यक्ति बिना यह सोचे कि इसके नतीजे क्या होंगे, अचानक से कुछ भी कर गुजरता है। इसमें ये आदतें शामिल हो सकती हैं:
- बिना सोचे-समझे अंधाधुंध पैसे खर्च करना
- खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाना
- एक साथ बहुत ज्यादा खाना
- नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करना
लगातार खालीपन का अहसास और खतरनाक विचार
बाहर से सब कुछ ठीक दिखने के बावजूद, ऐसे लोग भीतर से लगातार एक सूनापन या दुनिया से कटे होने का अहसास करते हैं। इसके अलावा, कुछ मामलों में व्यक्ति खुद को चोट पहुंचाने या आत्महत्या के बारे में भी सोच सकता है। इन विचारों और संकेतों को कभी भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और इसे पूरी गंभीरता से देखा जाना चाहिए।
सही इलाज से मिल सकती है राहत
सबसे अच्छी बात यह है कि BPD एक लाइलाज बीमारी नहीं है। डॉ. शर्मा बताते हैं कि पेशेवर डॉक्टरों की देखभाल, सही थेरेपी और अपनों के प्यार से लोग अपनी भावनाओं को स्वस्थ तरीके से संभालना और जीवन में मजबूत रिश्ते बनाना सीख सकते हैं।
इसलिए, अगर आप इन लक्षणों को समय रहते पहचान लेते हैं और किसी को सहानुभूति के साथ मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मिलने के लिए प्रेरित करते हैं, तो आपका यह कदम उस व्यक्ति की जिंदगी में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव ला सकता है।