भारत को ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था और लगता है कि यह प्यार आज भी कम नहीं हुआ है।
महिलाओं के पास अकेले 24,000-25,000 टन सोना है, जो अमेरिका, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और आईएमएफ के कुल आधिकारिक सोने के भंडार से भी ज्यादा है।
भारतीय घरों में कुल मिलाकर करीब 5 ट्रिलियन डॉलर का सोना है। यह आंकड़ा कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के कुल जीडीपी से भी बड़ा है।
सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव
भारत का सोने से रिश्ता सदियों पुराना है। प्राचीन काल से सोना सिर्फ धन नहीं, बल्कि देवी लक्ष्मी का प्रतीक, शुभता, सुरक्षा और परिवार की विरासत रहा है।
मंदिरों में सोना चढ़ाया जाता है, शादियों में स्त्री-धन के रूप में दिया जाता है और संकट के समय इसे बेचकर या गिरवी रखकर पैसे जुटाए जाते हैं। धनतेरस और अक्षय तृतीया जैसे त्योहारों पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है।
शादी-ब्याह का सबसे बड़ा ड्राइवर
भारत में सोने की सबसे बड़ी मांग शादियों से आती है। खासकर दक्षिण भारत (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश) में लगभग 40% सोने की खपत शादी के गहनों के कारण होती है।
यहां सोना सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि समृद्धि, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक है।
नए ट्रेंड: डिजिटल गोल्ड और इन्वेस्टमेंट
परंपरा के साथ-साथ बदलाव भी आ रहा है। युवा पीढ़ी (Gen Z) अब सिर्फ गहने नहीं, बल्कि निवेश के रूप में सोना खरीद रही है। गोल्ड ईटीएफ, डिजिटल गोल्ड, 24K गोल्ड बार और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की मांग बढ़ रही है।
2025 में डिजिटल गोल्ड खरीदारी में भारी उछाल आया। एनपीसीआई डेटा के मुताबिक लेन-देन 173% बढ़ गया।
बाजार के आंकड़े
- भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना आयातक देश है (हर साल 700-800 टन)।
- 2025 में प्रीशियस मेटल मार्केट का साइज 39.73 बिलियन डॉलर था, जो 2032 तक 68.15 बिलियन डॉलर पहुंचने की उम्मीद है।
- 2025 में भारत ने चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड ज्वेलरी कंज्यूमर बन गया।