अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किया गया एक एआई-जनरेटेड पोस्टर इन दिनों भारी विवादों में घिर गया है। भारतीय-अमेरिकियों को निशाना बनाने वाले इस पोस्टर में ‘सेल्फ-डिपोर्ट या परिणाम भुगतने’ जैसी चेतावनी दी गई है।
ऐसे में जब इसे शेयर किया गया, तब इस कैंपेन को लेकर सोशल मीडिया से लेकर मानवाधिकार संगठनों तक में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है और आलोचक इसे ‘नस्लवादी’ तथा ‘भारत विरोधी’ बता रहे हैं।
पोस्टर में क्या दिखाया गया है?
बता दें कि ट्रंप प्रशासन के सख्त अवैध आप्रवासन अभियान के तहत DHS के आधिकारिक एक्स अकाउंट से एक पोस्ट शेयर की गई थी। इसमें प्रसिद्ध ‘ट्रांसफॉर्मर्स’ फ्रेंचाइजी के कैरेक्टर्स का इस्तेमाल किया गया है।
पोस्ट में मुख्य किरदार ‘ऑप्टिमस प्राइम’ को एक दाढ़ी वाले भूरे रंग के व्यक्ति यानी ‘मिस्टर सिंह’ से यह कहते हुए दिखाया गया है कि सेल्फ-डिपोर्ट करो या परिणाम भुगतो।
पोस्ट के कैप्शन को लेकर भी विवाद
गौर करने वाली बात यह है कि इस पूरे विवाद की जड़ केवल पोस्ट और अप्रवासन नीति को लेकर सख्त संदेश नहीं है। इन सब के अलावा पोस्ट में यह भी लिखा गया है कि हमारे रास्तों से उतर जाओ, तुम गाड़ी चलाना नहीं जानते मिस्टर सिंह।
अब इस बात में तो कोई दोहराई नहीं है कि भारतीय और सिख समुदाय में ‘सिंह’ उपनाम का अत्यधिक इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में इसी आधार को देखते हुए इस टिप्पणी को सीधे तौर पर एक समुदाय विशेष को लक्षित करने वाला माना जा रहा है।
पोस्टर पर भारतीय समुदायों ने जताई आपत्ति
बता दें कि इस पोस्टर के सामने आने के बाद अमेरिका के प्रमुख हिन्दू और सिख संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) संगठन ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि ‘सिंह’ हिंदू हैं, वे सिख हैं, वे अमेरिकी हैं और वे गाड़ियां चलाते हैं।\
संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ट्रंप प्रशासन की तरफ से किया गया यह नस्लवादी, देश-विरोधी और भारत-विरोधी ट्रोलिंग हमारे देश की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है। HAF ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
सिख संगठन बोला- सिंह का अर्थ शेर होता है
दूसरी तरफ सिख कोएलिशन संगठन का कहना है कि 9/11 की घटना के 25 साल बाद भी सिखों को उनके रूप-रंग और पहचान के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है।
उनका कहना है कि अमेरिका में लाखों सिखों के नाम के आगे ‘सिंह’ जुड़ा है, जिसका अर्थ ‘शेर’ होता है। सरकार चाहे उन्हें दुश्मन के रूप में दिखाए, लेकिन सिख समुदाय अपनी पहचान को लेकर हमेशा निडर और अडिग रहेगा।
ट्रंप प्रशासन का अभियान और ट्रक ड्राइवरों का मुद्दा समझिए
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि यह पूरा विज्ञापन ट्रंप प्रशासन के उस बड़े अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत अवैध प्रवासियों और विशेष रूप से अप्रवासी ट्रक ड्राइवरों पर नकेल कसने की कार्रवाई की जा रही है।
DHS द्वारा जारी एक अन्य वीडियो में ‘मेगाट्रॉन’ को हरजिंदर सिंह, राजिंदर कुमार, बेकझन बेशेकीव, अखरोर बोजोरोव और जसवीर सिंह जैसे ट्रक ड्राइवरों की रिहाई की मांग करते हुए दिखाया गया है, जो सड़क हादसों या अन्य मामलों में लिप्त रहे हैं। DHS का तर्क है कि देश की सुरक्षा और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए वे हरसंभव कदम उठाएंगे।
‘CBP होम प्रोग्राम’ से जुड़ा है मामला
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब DHS अपने ‘CBP होम’ कार्यक्रम का प्रचार कर रहा है। इस कार्यक्रम के तहत पात्र अवैध प्रवासियों को अपनी मर्जी से अमेरिका छोड़ने के लिए रजिस्ट्रेशन करने को कहा जाता है।
नियम के मुताबिक, जो प्रवासी सेल्फ-डिपोर्टेशन के लिए रजिस्ट्रेशन करते हैं, उन्हें यात्रा में सहायता और लगभग 2.2 लाख रुपये तक का ‘एग्जिट बोनस’ दिया जाता है। इसी योजना के प्रचार के लिए यह विवादित तरीका अपनाया गया।