शेर-भेड़िया से लेकर ‘शोले’ तक, शिंदे ने भाषण में उद्धव ठाकरे को घेरा…

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिवसेना का 60वां स्थापना दिवस अलग-अलग दावों के साथ मनाया। एक ने बाघों, शेरों, भौंकने वाले कुत्तों और एक ऐसे राजनीतिक ट्रेलर की बात की जिसकी पूरी तस्वीर अभी सामने आनी बाकी थी। वहीं दूसरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से भावुक अपील की।

यह टकराव उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) के लिए एक नए संकट के बीच देखने को मिल रहा है। पार्टी के नौ में से छह लोकसभा सांसदों के शिंदे की अगुवाई वाली प्रतिद्वंद्वी शिवसेना में शामिल होने की खबरें हैं।

एकनाथ शिंदे ने किसे शेर कहा और किसे कुत्ता?

मुंबई में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शिंदे ने अपने गुट को बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत का असली उत्तराधिकारी बताने की कोशिश की।

शिंदे ने कहा, “यह तो बस ट्रेलर है। असली फिल्म तो अभी आनी बाकी है। आज आपके सामने एक शेर खड़ा है। कुछ कुत्ते भौंकते रहते हैं। कल और परसों भी वे भौंकते रहेंगे। मैं आपको एक बात बताता हूं कुत्ते झुंड में भौंकते हैं, लेकिन शेर अकेला आता है। जब शेर शिकार करता है तो कुत्ते भौंकते रहते हैं। जब शेर दहाड़ता है तो कुत्ते भौंकते रहते हैं। यही शिवसेना है। यही शिवसेना है। और आज यह शिवसेना महाराष्ट्र में मजबूती से खड़ी दिखाई दे रही है।”

‘जाने वाला क्यों जा रहा, आत्मचिंतन तो करो’

ठाकरे का नाम लिए बिना शिंदे ने सवाल किया कि नेता और कार्यकर्ता विरोधी गुट को क्यों छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “कुछ लोग कहते रहते हैं अगर कोई जाना चाहता है तो उसे खुशी-खुशी जाने दो। उन्हें देखिए वे रोज बकवास करते रहते हैं। ठीक है उन्हें जाने दीजिए। लेकिन अब तो हर कोई जा रहा है। वे क्यों जा रहे हैं? जरा आत्म-मंथन और आत्म-निरीक्षण तो कीजिए।”

शोले फिल्म का डायलॉग भी सुनाया

शिंदे ने अपने विरोधियों पर तंज कसने के लिए हिंदी फिल्म शोले की एक मशहूर लाइन का जिक्र किया। उन्होंने पूछते हुए कहा, “क्या आपको फिल्म शोले में असरानी का डायलॉग याद है? आधे लोग इधर जाओ आधे उधर जाओ और बाकी मेरे पीछे आओ। लेकिन उनके पीछे कौन है? कोई नहीं। उनके पास बस कांटे और चम्मच ही बचे हैं। ऐसी पार्टी कैसे टिक सकती है?”

‘शिवसैनिक ही बालासाहेब के असली उत्तराधिकारी’

शिंदे ने दावा किया, “आपके पैरों के नीचे कोई जमीन नहीं है, आपके पैरों के नीचे कोई जमीन नहीं है। हैरानी की बात यह है कि आपको अभी भी इसका एहसास नहीं है।” अपने पूरे भाषण के दौरान शिंदे ने उस मुख्य सवाल का जवाब देने की कोशिश की जो शिवसेना के बंटवारे के बाद से ही उसे परेशान कर रहा है कि बाल ठाकरे की असली राजनीतिक विरासत का प्रतिनिधित्व कौन करता है।

शिंदे ने दावा किया, “बालासाहेब ठाकरे के असली उत्तराधिकारी मेरे शिवसैनिक हैं। उत्तराधिकार खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि विचारधारा से तय होता है। शिवसेना जमीन का कोई टुकड़ा नहीं है, यह लाखों लोगों की विचारधारा है।”

डिप्टी सीएम ने 2022 में उद्धव ठाकरे से अलग होकर बीजेपी के साथ जाने के अपने फैसले का भी बचाव किया। शिंदे के मुताबिक, विरोधियों ने राजनीतिक बर्बादी की भविष्यवाणी की थी और दावा किया था कि वह अपने गांव लौटकर खेती करने लगेंगे। इसके उलट उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा में उनके गुट की ताकत बढ़ी है।

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