कहते हैं कि अगर मेहनत से किसी चीज को हासिल करने की कोशिश की जाए, तो व्यक्ति असफल नहीं होता। जरूरत होती है जुनून की, जो कामयाबी का रास्ता दिखाता है।
ऐसा ही कारनामा कर दिखाया है एक किसान के बेटे ने। हम बात कर रहे हैं यूपी के जिला बस्ती से आने वाले प्रभात मिश्रा की, जिन्होंने 1 नहीं बल्कि 3-3 स्टार्टअप शुरू किए और आज उनकी एक कंपनी की वैल्यू 40 करोड़ रुपये है।
ये था पहला स्टार्टअप
प्रभात बचपन से ही तकनीक, मशीनों और नए प्रयोगों की तरफ आकर्षित होते थे। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने स्टार्टअप और एंटरप्रेन्योरशिप में एंट्री कर ली। उनके पहले स्टार्टअप का नाम था टेकएक्स इंजीनियर्स, जो जुलाई 2017 में शुरू हुआ था। जबकि उनकी बैचलर डिग्री ही जून 2018 में पूरी हुई थी।
मगर उनका ये स्टार्टअप फवरी 2019 में बंद हो गया। फिर इंजीनियरिंग कम्प्लीट करने के बाद उन्होंने मार्च 2019 में उमागा टेक्नोलॉजीज की शुरुआत की, जो आज भी चल रही है। ये एक एआई कंपनी है।
उनका तीसरा स्टार्टअप है सितंबर 2023 में शुरू किया गया Umaga Edutech Private Limited। ये कंपनी भी कारोबार कर ही है। ये भी एक एआई कंपनी है।
स्टूडेंट्स के लिए खास पहल
Umaga Edutech के तहत प्रभात ने ब्रेन इनोवेशन लैब शुरू की, जिसे कई स्कूलों में ऑपरेट किया जाता है। ये लैब स्टूडेंट्स को रोबोटिक्स, एआई, इंटरनेट आफ थिंग्स, थ्रीडी प्रिंटिंग, एरोमाडलिंग, सैटेलाइट एंड स्पेस टेक्नोलाजी, डिजाइन थिंकिंग और इनोवेशन जैसे सब्जेक्ट्स पर प्रोजेक्ट बेस्ड प्रैक्टिकल लर्निंग कराती है।
40 हजार से 40 करोड़
Umaga Edutech की शुरुआत 40 हजार रुपये से हुई थी, जिसकी वैल्यू आज 40 करोड़ रुपये है। इसका सालाना टर्नओवर 2-3 करोड़ रुपये है। प्रभात की कंपनी ने 60 युवाओं को रोजगार भी दिया है। इतना ही नहीं, वे सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा भी प्रोवाइड कर रहे हैं।
22 स्कूलों के छात्रों को दी ट्रेनिंग
एआई और बाकी चीजों में प्रभात के स्टार्टअप ने 22 स्कूलों के छात्रों को ट्रेन किया है, जिसमें 9 स्कूल सरकारी हैं। खुद प्रभात के अनुसार स्कूलों में एआई से पढ़ाई रोचक बन रही है। इसके अलावा छात्रों के सीखने की क्षमता बेहतर हो रही है।
वे बताते हैं कि एआई टूल्स के जरिए विद्यार्थियों को उनकी क्षमता के हिसाब से पढ़ाया जा सकता है। पहले के मुकाबले, जब एक कक्षा में सब बच्चों को एक ही समान पढ़ाया जाता था, अब एआई के जरिए हर छात्र की सीखने की शैली और क्षमता के अनुसार उसे ट्रेन किया जा सकता है।