बिहार में बच्चों के पोषण पर जोर: सरकारी स्कूलों में बनेगी ‘पोषण वाटिका’, उगाई जाएंगी मौसमी सब्जियां…

 सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को अब मध्याह्न भोजन के साथ ताजी और जैविक साग-सब्जियां व फल उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए जिले के चयनित विद्यालयों में बरसात के मौसम से पोषण वाटिका विकसित की जाएगी।

शिक्षा विभाग ने इसे कुपोषण से लड़ाई और बच्चों में पौष्टिक भोजन की आदत विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए अभियान को तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया है। मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र के निर्देश पर जिला शिक्षा विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों को पत्र जारी किया है।

पहले चरण में जिले के करीब 30 प्रतिशत ऐसे विद्यालयों का चयन किया गया है, जहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। प्रत्येक विद्यालय में कम से कम 20 फीट व 20 फीट क्षेत्रफल में पोषण वाटिका तैयार की जाएगी।

जिला शिक्षा विभाग ने सभी चयनित विद्यालयों को निर्देश दिया है कि अभियान का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि बच्चों को स्कूल में ही ताजा, सुरक्षित और पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके।

गमलों और कंटेनरों में भी उगेंगी सब्जियां

जिन शहरी विद्यालयों में पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां गमले, प्लास्टिक बैग, कंटेनर और अन्य पात्रों में सब्जियों की खेती की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्थान की कमी अभियान में बाधा नहीं बनेगी और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप पोषण वाटिका विकसित की जाएगी।

फलदार पौधों के साथ उगेंगी मौसमी सब्जियां

पोषण वाटिका में पपीता, केला, सहजन, कटहल, अमरूद, नींबू, आंवला और करी पत्ता जैसे फलदार एवं उपयोगी पौधों के साथ बरबट्टी, कोहड़ा, खीरा, नेनुआ, तोरई, सेम, पोई साग, टमाटर और बैंगन जैसी सब्जियां उगाई जाएंगी। बीज और पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र और संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित किया जाएगा।

बाल संसद और मीना मंच निभाएंगे अहम भूमिका

अभियान की निगरानी के लिए प्रत्येक विद्यालय में एक नोडल शिक्षक नामित किया जाएगा, जबकि जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक इसकी मॉनिटरिंग करेंगे। विद्यालय शिक्षा समिति की बैठक कर पोषण वाटिका के लिए स्थल चयन, सिंचाई और देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

साथ ही बाल संसद, मीना मंच तथा कक्षा छह से आठ तक के छात्र-छात्राओं को इस अभियान से जोड़ते हुए उन्हें अपने घरों में भी पोषण वाटिका विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

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