रायपुर : अबूझमाड़ के जंगलों से सुशासन की गूंज…

सुशासन एक्सप्रेस से बदल रही दूरस्थ गांवों की तस्वीर

नारायणपुर प्रशासन की अनोखी पहल- 28 हजार से अधिक आवेदनों में से 19 हजार का मौके पर ही निपटारा

चौपाल पर मिल रहीं बुनियादी सुविधाएं

छत्तीसगढ़ के घोर नक्सल प्रभावित और दुर्गम अबूझमाड़ क्षेत्र में विकास और विश्वास की एक नई बयार बह रही है।

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नारायणपुर जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए “सुशासन एक्सप्रेस” अभियान ने सुदूर वनांचलों में रहने वाले ग्रामीणों की जिंदगी को आसान बना दिया है। शासन की योजनाएं और आवश्यक सेवाएं अब दफ्तरों की फाइलों से निकलकर सीधे आदिवासियों के घर-आंगन तक पहुंच रही हैं।

            ​इस अभियान के तहत अब तक 28 हजार 273 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से रिकॉर्ड 18 हजार 908 आवेदनों का त्वरित निराकरण कर दिया गया है। यह पहल न केवल ग्रामीणों को शासकीय सुविधाएं दे रही है, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच के भरोसे को भी मजबूत कर रही है।

​चौपाल पर कलेक्ट्रेट- गांव-गांव पहुंच रहा प्रशासनिक अमला

    ​        आमतौर पर जिन गांवों तक पहुंचने के लिए पथरीले रास्तों और नदी-नालों को पार करना पड़ता है, वहां आज जिला प्रशासन का दल खुद पहुंच रहा है। सुशासन एक्सप्रेस के जरिए पांगुड़, घमंडी, रेकावाया, ओरछा, गोमे, कच्चापाल, जाटलूर, गारपा, कस्तूरमेटा, रायनार, कोहकामेटा और कोंगे जैसे अत्यंत संवेदनशील और दूरस्थ गांवों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। ​इन शिविरों का सबसे बड़ा लाभ महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को मिल रहा है, जिन्हें पहले छोटे से काम के लिए भी जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे।

​आंकड़ों की नजर में श्सुशासन एक्सप्रेसश् की सफलता

     ​     अभियान के दौरान विभिन्न बुनियादी सेवाओं और योजनाओं को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा गया। नारायणपुर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित सुशासन एक्सप्रेस शिविरों में शासन की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं को लेकर ग्रामीणों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया।

​अबूझमाड़ के इन सुदूर और संवेदनशील क्षेत्रों में सबसे बड़ी जरूरत पहचान और डिजिटल कनेक्टिविटी की थी, यही वजह है कि शिविरों में सर्वाधिक 10 हजार 682 आवेदन आधार कार्ड को अपडेट करने और एम.बी.यू. के लिए प्राप्त हुए।

इसके साथ ही, ग्रामीणों को एक मजबूत सुरक्षा कवच देने के लिए 4 हजार 081 आयुष्मान कार्ड और 2 हजार 729 नए आधार कार्ड बनाने के आवेदनों पर तेजी से काम किया गया।​दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की सुलभता सुनिश्चित करते हुए 1,704 ग्रामीणों को मौके पर ही स्वास्थ्य सेवाएं एवं आवश्यक उपचार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, नागरिक अधिकारों और शासकीय रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के क्रम में 855 जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और 374 जाति प्रमाण पत्र के आवेदन दर्ज किए गए।

          ​ग्रामीणों को वित्तीय मुख्यधारा से जोड़ने और सरकारी लाभ सीधे उनके खातों में पहुंचाने के उद्देश्य से 846 नए बैंक खाते खोले गए। इसके साथ ही, खाद्य सुरक्षा और आजीविका सुदृढ़ीकरण की दिशा में 752 राशन कार्ड सेवाओं, 456 श्रम कार्ड तथा 331 मनरेगा जॉब कार्ड से संबंधित आवेदनों का त्वरित निपटारा किया गया।

समाज के सबसे जरूरतमंद तबके को संबल देते हुए 249 बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन की योजनाओं से भी जोड़ा गया। अधिकतर आवेदनों का मौके पर ही तत्काल निराकरण कर दिया गया है, जबकि शेष बचे हुए आवेदन वर्तमान में प्रक्रियाधीन हैं और उन पर तेजी से काम चल रहा है।

​ये आंकड़े इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि श्सुशासन एक्सप्रेसश् सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन को सुगम और सुरक्षित बनाने का एक सशक्त माध्यम बन चुकी है।

समय और पैसे की बचत, अंतिम व्यक्ति तक पहुंच

           ​इस जन-कल्याणकारी अभियान को लेकर नारायणपुर ककलेक्टर ने कहा कि सुशासन एक्सप्रेस का मुख्य उद्देश्य शासन की हर छोटी-बड़ी सुविधा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। विभिन्न विभागों के अधिकारी खुद गांवों में कैंप कर रहे हैं ताकि कागजी प्रक्रियाओं को मौके पर ही पूरा कर हितग्राहियों को तुरंत लाभ दिया जा सके।

अब अबूझमाड़ के ग्रामीणों को पहचान पत्र, पेंशन या इलाज जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए मीलों का सफर तय नहीं करना पड़ता। इससे उनके समय और आर्थिक संसाधनों (किराया-भाड़ा) की बड़ी बचत हो रही है। सुशासन एक्सप्रेस सही मायने में बस्तर के इस सुदूर अंचल में विकास की नई जीवनरेखा बनकर उभरी है।

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