‘ड्रोन से ड्रोन लॉन्च’, होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने की तैयारी, कैसे होगा यह ऑपरेशन?…

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही लगातार बाधित हो रही है।

इस जलमार्ग को सुरक्षित करने और वैश्विक व्यापार को फिर से शुरू करने के लिए ब्रिटेन, अमेरिका और फ्रांस जैसी वैश्विक शक्तियां अत्याधुनिक मानवरहित बारूदी सुरंग-निवारण (माइन-क्लीयरिंग) प्रणालियों को तैनात करने की तैयारी कर रही हैं।

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन कनाडा की कंपनी क्रैकन रोबोटिक्स द्वारा विकसित स्वायत्त (Autonomous) माइनहंटिंग जहाज भेजेगा, ताकि बहुराष्ट्रीय अभियान के तहत हालात सामान्य होने पर जलडमरूमध्य को फिर से सुरक्षित बनाया जा सके।

क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से वैश्विक बाजार तक पहुंचता है। यदि इस मार्ग में बारूदी सुरंगों का खतरा बना रहता है, तो तेल आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और बीमा लागत पर बड़ा असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक समुद्री माइंस द्वितीय विश्व युद्ध के दौर की माइंस से कहीं अधिक उन्नत हैं। इन्हें समुद्र तल पर छिपाकर रखा जाता है और जहाजों की गतिविधि का पता चलते ही सक्रिय हो जाती हैं।

ब्रिटेन की रॉयल नेवी के पूर्व रियर एडमिरल जॉन पेंट्रीथ ने कहा, “माइनफील्ड में वास्तव में माइंस हों या न हों, जब तक लोगों को खतरे का शक रहेगा, तब तक वह प्रभावी बना रहेगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आप कैसे साबित करेंगे कि वहां माइंस नहीं हैं?”

अब युद्ध में ड्रोन लॉन्च कर रहे ड्रोन

रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक नौसेनाएं अब बिना चालक वाले सिस्टम पर ज्यादा निर्भर हो रही हैं। इनमें सतह पर चलने वाले ड्रोन जहाज, सोनार सिस्टम और पानी के भीतर काम करने वाले सबमर्सिबल ड्रोन शामिल हैं।

यूक्रेन-ब्रिटेन की स्टार्टअप कंपनी Uforce के CEO ओलेग रोगिंस्की ने कहा, “अब ड्रोन, दूसरे ड्रोन लॉन्च कर रहे हैं। ऑपरेटर लंदन में बैठकर भी इन्हें नियंत्रित कर सकता है।”

लक्ष्य हर माइन हटाना नहीं, सुरक्षित रास्ता बनाना

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि उद्देश्य हर एक माइन को ढूंढना नहीं है, बल्कि इतना सुरक्षित रास्ता तैयार करना है कि व्यापारिक जहाज फिर से गुजर सकें।

किन देशों ने की है निवेश?

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने आधुनिक स्वायत्त माइन-क्लियरिंग तकनीकों में भारी निवेश किया है।

अमेरिका

अमेरिकी नौसेना के पास टेक्स्ट्रॉन सिस्टम्स का कॉमन अनक्रूड सरफेस व्हीकल का AQS-20 सोनार सिस्टम बैराकूडा सबमर्सिबल ड्रोन मौजूद हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, “ईरान द्वारा बिछाई गई माइंस इतनी व्यापक नहीं हैं कि हमारी अत्याधुनिक तकनीक सुरक्षित रास्ता न बना सके।”

ब्रिटेन और फ्रांस

ब्रिटिश और फ्रांसीसी नौसेनाएं थैल्स द्वारा विकसित नए Maritime Mine Counter Measures सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं। इसमें शामिल हैं- पानी के भीतर काम करने वाले हंटर ड्रोन ब्रिटेन ने अपने HMS Lyme Bay सपोर्ट शिप को “मदरशिप” के रूप में तैयार किया है, जो इन स्वायत्त सिस्टम को ऑपरेट कर सकेगा।

यूके डिफेंस स्टाफ प्रमुख रिच नाइटन ने कहा, “हमारे पास स्वायत्त माइनहंटिंग की विश्वस्तरीय क्षमता है। इससे सैनिकों को सीधे खतरे में डाले बिना जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।”

जर्मनी

जर्मनी की Euroatlas कंपनी ने भी अपने “Greyshark” सबमर्सिबल ड्रोन यूरोप के दो रक्षा मंत्रालयों को देने के लिए अनुबंध किए हैं।

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