सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई के प्रसिद्ध न्यूरोलाजिस्ट सुब्बैया की 2013 में दिनदहाड़े हुई हत्या के दोषियों को बरी करने के मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया है।
शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के फैसले को रद करते हुए सभी नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। ट्रायल कोर्ट ने कई दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन हाई कोर्ट ने दोषियों को बरी कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने दी उम्रकैद की सजा
मामला सुप्रीम कोर्ट में आने पर जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा मृत्युदंड की मांग न करने के फैसले पर गौर करते हुए सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
96 पृष्ठों के फैसले को लिखते हुए जस्टिस शर्मा ने रवींद्रनाथ टैगोर का उद्धरण दिया। टैगोर ने कहा था, लालच की कोई समय सीमा नहीं होती। इसे न तो सुंदर प्रकृति पर दया आती है और न ही मनुष्यों पर। यह क्षणभर भी संकोच किए बिना जीवन को कुचलने के लिए निर्दयतापूर्वक तैयार रहता है।
आरोपितों ने 14 सितंबर 2013 को जमीन के विवाद के चलते डॉक्टर की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। 2021 में ट्रायल कोर्ट ने सात दोषियों को मौत की सजा और दो दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
इसके बाद जून 2024 में मद्रास हाई कोर्ट ने साक्ष्य में खामी और गवाहों के बयानों में देरी को देखते हुए सभी आरोपितों को बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया और निचली अदालत के दोषी ठहराने के फैसले को बहाल कर दिया।