फ्रांस में 19वीं शताब्दी की शुरुआत में एक कहावत खूब कही जाती थी, ‘Il faut souffrir pour être belle’। अंग्रेजी में इसका मतलब होता है ‘वन मस्ट सफर टू बी ब्यूटीफुल’ और हिंदी में कहते हैं ‘सुंदरता के लिए थोड़ा कष्ट तो सहना ही पड़ता है’। आज के दौर में यह सदियों पुरानी कहावत पूरे यूरोप के लिए एकदम सटीक बैठती है।
इस कहावत और यूरोप के संबंध को हम इसलिए जोड़ रहे हैं, क्योंकि यूरोप इन दिनों भीषण और जानलेवा लू की चपेट में है। कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। गर्मी का आलम यह है कि सड़कें पिघल रही हैं, ट्रेन की पटरियां मुड़ रही हैं और बिजली ग्रिड ठप होने की कगार पर हैं। इसके बावजूद यूरोप के लोग अपने घरों में एयर कंडीशनर (AC) लगाने से कतराते हैं। आइए जानते हैं क्यों?
खूबसूरती बचाने के लिए सह रहे कष्ट
भीषण गर्मी के बावजूद भी वहां के लोग अपनी ऐतिहासिक इमारतों की खूबसूरती और सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए घरों और अस्पतालों में एयर कंडीशनर (AC) लगाने से कतरा रहे हैं। यूरोप के शहरों की गर्मी के चलते जैसी आज स्थिति है यह मुहावरा सिर्फ एक फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि तपते यूरोप की एक बड़ा सामाजिक हकीकत बन चुका है।
कहा जाता है कि यूरोप के लोग अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को बचाने के मामले में बड़े स्वार्थी होते हैं। फिर सवाल ये है कि आखिर ऐसा और क्या-क्या कारण है कि, जिसके चलते आज के समय में भी यूरोप के लोग भीषण गर्मी झेलने के लिए तैयार हैं, लेकिन एयर कंडीशनर (AC) नहीं।
अमेरिका की तरह नहीं दिखना चाहते
जानकार कहते हैं कि यूरोपीय शहरों के योजनाकारों का मानना है कि इमारतों के बाहर लटके AC के डिब्बे बेहद बदसूरत लगते हैं। पेरिस की डिप्टी मेयर ऑड्रे पुल्वार ने कहा कि हम अमेरिकी, ब्राजीलियाई या इतालवी शहरों की तरह नहीं बनना चाहते, जहां दीवारों पर AC की कतारें लगी होती हैं, जो भारी शोर करती हैं और जहरीली गैसें छोड़ती हैं।
पेरिस जैसे ऐतिहासिक शहरों में प्राचीन इमारतों की खूबसूरती (जैसे हॉसमैन-दौर की चूना पत्थर वाली दीवारें) को बनाए रखने के लिए बाहर AC लगाने की अनुमति आसानी से नहीं मिलती।
पड़ोसियों का ऐतराज और ‘शोर’ का कानून
इसके अलावा यूरोप में AC लगाना सिर्फ आपका निजी फैसला नहीं है। अगर आप अपार्टमेंट में रहते हैं, तो आपको पड़ोसियों और स्थानीय प्रशासन से मंजूरी लेनी होगी। फ्रांस के कानून के मुताबिक, अगर आपके AC की आवाज हल्की हवा के चलने से ज्यादा है, तो सोसायटी उस पर रोक लगा सकती है।
शोर के मुकदमों के विशेषज्ञ वकील क्रिस्टोफ सैनसन ने बताया कि अब उनके पास AC के शोर से जुड़े 100 से ज्यादा मामले आ रहे हैं। पेरिस के 32 वर्षीय लुका फुनारो, जो एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित हैं, पिछले दो साल से अपने घर में AC लगाने की भीख मांग रहे हैं, लेकिन पड़ोसी ‘शोर होने’ का बहाना बनाकर हर बार उनका प्रस्ताव खारिज कर देते हैं।
पर्यावरण और क्लाइमेट चेंज की चिंता
यूरोप खुद को पर्यावरण संरक्षण में सबसे आगे रखता है। वहां की सरकारों का मानना है कि AC बहुत ज्यादा बिजली खाते हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है और ग्लोबल वार्मिंग में इजाफा होता है। इसलिए सरकारें AC के बजाय घरों में बेहतर इन्सुलेशन, खिड़कियों पर पर्दे, प्राकृतिक हवा और पेड़ लगाने को बढ़ावा देती हैं।
फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबट ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि हर जगह AC लगा दो, मैं उनकी सोच से हैरान हूं। क्या AC लगाने से जंगलों की आग रुक जाएगी? क्या इससे फसलें मरने से बच जाएंगी?
बुनियादी ढांचा 40 डिग्री के लिए बना ही नहीं था
अच्छा, इन सभी चिजों के अलावा गौर करने वाली बात यह है कि यूरोप का इतिहास हमेशा से ठंडे मौसम का रहा है। यहां की इमारतें और बुनियादी ढांचा इस तरह बनाया गया था कि वे ठंड को रोक सकें, न कि गर्मी को। पिछले हफ्ते पेरिस में 19वीं सदी के बाद केवल चौथी बार तापमान 40 डिग्री के पार गया।
ऐसे में अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने सोचा था कि ऐसा मौसम 2030 के बाद आएगा, लेकिन यह अभी से ही शुरू हो गया है। गर्मी के कारण हजारों स्कूल बंद करने पड़े हैं, जिससे महामारी के लॉकडाउन जैसी यादें ताजा हो गई हैं।
अब AC पर शुरू हो गई है राजनीति, समझिए कैसे?
इसके अलावा बदलते मौसम के साथ अब एयर कंडीशनर यूरोप में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने देशव्यापी ‘AC प्लान’ लागू करने की मांग करते हुए कहा कि यह गर्मी लोगों की जान ले रही है, हमें तुरंत बड़े पैमाने पर AC लगाने की योजना बनानी चाहिए।
क्या समय के साथ बदल रही सोच?
अब सवाल ये है कि क्या अब लोगों की सोच बदल रही है? असहनीय होती गर्मी के कारण अब लोगों की सोच धीरे-धीरे बदल रही है। ब्रिटेन में अब पोर्टेबल AC की मांग तेजी से बढ़ी है। लंदन के मेयर सादिक खान ने भी वकालत की है कि अब स्कूलों, दफ्तरों और अस्पतालों में कूलिंग सिस्टम लगाए जाने चाहिए।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक राधिका खोसला के अनुसार, केवल पेड़ों या खिड़कियों के भरोसे रहने के बजाय, अब यूरोप को अपनी इमारतों के डिजाइन को बदलने के साथ-साथ जरूरत के हिसाब से AC का इस्तेमाल शुरू कर देना चाहिए।