नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु ताइवान में विमान दुर्घटना में होने के दावे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
ताइवान सरकार की ओर से कथित विमान दुर्घटना संबंधी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं होने का दावा सामने आने के बाद दो युवा शोधकर्ताओं और लेखकों सौम्यब्रत दासगुप्त व सैकत नियोगी ने केंद्र सरकार से नेताजी की मृत्यु रहस्य की नई जांच के लिए आयोग गठित करने की अपील की है।
शुक्रवार को कोलकाता प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दोनों शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने पहले ताइवान सरकार से उस कथित विमान दुर्घटना की सत्यता जानने के लिए आवेदन किया था।
उनके अनुसार, ताइवान सरकार से मान्यता प्राप्त शोधकर्ता येन जुंग च्यांग ने ईमेल के जरिये लिखित जवाब में बताया कि ताइवान सरकार के पास ऐसा कोई दस्तावेज या सूचना नहीं है, जिससे नेताजी की तथाकथित मृत्यु की पुष्टि होती हो।
सौम्यब्रत और सैकत का दावा है कि यह जानकारी नेताजी के गायब होने के रहस्य से जुड़े मामले में विस्फोटक रिपोर्ट के समान है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने सुभाष बोस रिसर्च सेंटर नामक संगठन का गठन किया है और नेताजी के समर्थकों व शोधकर्ताओं से इस अभियान से जुड़ने की अपील की है।
दोनों शोधकर्ताओं का कहना है कि दशकों से इतिहास को झूठ के कुहासे में ढकने का प्रयास किया गया। उनका दावा है कि ताइवान सरकार के जवाब से यह स्पष्ट हो गया है कि 18 अगस्त 1945 को किसी विमान दुर्घटना में नेताजी की मृत्यु नहीं हुई थी।
उन्होंने केंद्र के गृह मंत्रालय से मांग की कि मुखर्जी आयोग की सिफारिशों के आधार पर नए अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग का गठन किया जाए। साथ ही इस मुद्दे पर संसद में फिर से चर्चा शुरू करने की भी अपील की गई है।