देवेंद्र रावत, गोपेश्वर (चमोली)। मां की ममता हार गई थी। परिस्थितियां जो भी रही हों, उसने जिगर के टुकड़े को बरसाती नाले में फेंक दिया था। अबोध नवजात को पता नहीं था उसके साथ क्या और क्यों हो रहा है। भले ही अपने गैर हो गए थे लेकिन उसके चाहने वालों की लंबी फेहरिस्त थी।
एक-दो नहीं, पूरे 57 हजार दंपती ऐसे थे जिन्होंने उसे अपनाने की इच्छा जाहिर की थी। डाक्टरों ने भी पूरी कोशिश की। उसे दुनिया दिखाने के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था। नवजात 15 दिन की जंग जीत नहीं पाया। उसने आंखें बंद कर दी और उन हजारों दंपती की उम्मीद टूट गई जो उसके आने से अपने घर में किलकारी गूंजने का इंतजार कर रहे थे।
नवजात के दिल में छेद था
घटना छह अगस्त की है। गोशाला गई एक महिला को चमोली के पास रांगतोली गांव में बरसाती नाले में रोता हुआ नवजात पड़ा मिला था। पुलिस ने पहले जिला चिकित्सालय में उसका प्राथमिक उपचार कराया फिर श्रीनगर मेडिकल कालेज में भर्ती कराया था। यहां डाक्टरों ने उपचार में पूरी ताकत झोंक दी। नवजात के दिल में छेद था।
मल्टीपल इंफेक्शन था। पीलिया की शिकायत थी। चिकित्सकों के अनुसार, जन्म देने वाली मां का वैक्सीनेशन न होने से नवजात के स्वास्थ्य को लेकर दिक्कतें थीं। जिला प्रोबेशन अधिकारी धनंजय लिंगवाल ने बताया कि नवजात ने गुरुवार दोपहर 11 बजे दम तोड़ दिया।