चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) में तैनात कर्मचारी राकेश कुमार के बेटे 25 वर्षीय अंशु की रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान मौत हो गई है। अंशु 20 अप्रैल 2025 को स्टडी वीजा पर रूस गया था, लेकिन एजेंटों ने धोखे से रूसी सेना में भर्ती करा दिया।
मूलरूप से हरियाणा के रेवाड़ी जिले के निवासी राकेश कुमार परिवार के साथ चंडीगढ़ के सेक्टर-29 में रहते हैं। अंशु की सारी शिक्षा चंडीगढ़ में ही हुई है। राकेश ने बताया कि परिवार ने अंशु को पढ़ाई के लिए रूस भेजने में करीब 6 लाख रुपये खर्च किए थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा के कई युवाओं को रूस में इमिग्रेशन एजेंटों ने अच्छी नौकरी का लालच दिया, लेकिन बाद में उन्हें धोखे से रूस-यूक्रेन युद्ध में धकेल दिया गया। 4 अप्रैल को उन्हें रूसी सेना में सेवा दे चुके एक पूर्व सैनिक का फोन आया, जिसने बताया कि उनके बेटे की मौत हो गई है।
उसने यह भी बताया कि शव अभी मोर्चे से मास्को नहीं पहुंचा है और वहां पहुंचने के बाद भारत आने में 10-15 दिन और लगेंगे। अंशु सोनीपत के एक ट्रैवल एजेंट के माध्यम से रूस गया था। नवंबर में परिवार का अंशु से संपर्क टूट गया था और हाल ही में उसकी मौत की जानकारी मिली।
तीन अन्य युवाओं के शव भी हाल ही में भारत लाए गए
अंशु का मामला अकेला नहीं है। हरियाणा के तीन अन्य युवाओं के शव भी हाल ही में भारत लाए गए हैं, जिनके साथ भी ऐसा ही हुआ।राकेश ने बताया कि उन्होंने हरियाणा के अन्य अभिभावकों के साथ, जिनके बच्चे इसी तरह रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे हैं।
पिछले साल नवंबर और दिसंबर में दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। हाल के हफ्तों में हरियाणा के करनाल, फतेहाबाद और सोनीपत के तीन अन्य युवाओं के शव भी रूस से भारत लाए गए हैं।