पोलैंड में तख्तापलट की कोशिश… प्रधानमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश को पद से हटाया; राष्ट्रपति का विमान बीच रास्ते से लौटा…

पोलैंड में शुक्रवार को सरकार और राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी गुट के बीच नया तनाव देखने को मिला। देश के संवैधानिक न्यायाधिकरण के मुख्य न्यायाधीश बोगदान श्विएचकोव्स्की को सस्पेंड कर दिया गया, जिसके बाद वहां दंगा-रोधी पुलिस तैनात कर दी गई।

पोलैंड में बढ़ते विवाद के बीच राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी ने अफ्रीका की अपनी आधिकारिक यात्रा बीच में ही छोड़ दी और वारसॉ लौटने का फैसला किया।

पोलैंड में तख्तापलट?

संवैधानिक न्यायाधिकरण के मुख्य न्यायाधीश बोगदान श्विएचकोव्स्की को पद से हटाए जाने के बाद विपक्षी ‘लॉ एंड जस्टिस’ पार्टी (PiS) के समर्थक बोगदान श्विएचकोव्स्की के समर्थन में आए। लोगों को आता देख कोर्ट के बाहर दर्जनों पुलिसकर्मी तैनात किए गए।

कोर्ट के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर इस घटनाक्रम को ‘तख्तापलट’ करार दिया गया और कहा गया कि श्विएचकोव्स्की अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं।

मुख्य न्यायाधीश को क्यों सस्पेंड किया गया?

मुख्य न्यायाधीश को हटाने का फैसला पोलैंड की शीर्ष अदालत के गठन और कामकाज को लेकर चल रहे लंबे विवाद के बीच उठाया गया है।

सरकार उन जजों को हटाने की कोशिश कर रही है, जिन्हें पिछली PiS सरकार (जिसने 2015 से 2023 तक देश पर शासन किया था) के कार्यकाल में नियुक्त किया गया था।

इस निलंबन की घोषणा संवैधानिक न्यायाधिकरण की जज अन्ना कोरविन-पियोट्रोव्स्का ने की। न्याय मंत्री और अटॉर्नी जनरल वाल्डेमार ज़ुरेक ने कहा कि उन्होंने श्विएचकोव्स्की और उनके डिप्टी बार्टलोमी सोचांस्की को मिली कानूनी छूट को हटाने की मांग की थी।

इसके पीछे सियासत की जंग?

2023 के चुनाव के बाद पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनल्ड टस्क बने। टस्क ने ब्रुसेल्स (यूरोपीय संघ) के साथ चल रहे लंबे विवाद को सुलझाने और कानून के शासन (rule of law) को बहाल करने का वादा किया था।

हालांकि, राष्ट्रपति नवरोकी ने संवैधानिक न्यायाधिकरण के लिए सरकार द्वारा भेजे गए नामों को मंजूरी देने से रोक दिया है, जिससे संस्थागत गतिरोध और गहरा गया है।

यह टकराव प्रधानमंत्री डोनल्ड टस्क की मध्यमार्गी सरकार और राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी गुट के बीच न्यायिक नियुक्तियों और अदालतों की स्वतंत्रता को लेकर चल रही एक बड़ी लड़ाई का हिस्सा है।

PiS के कार्यकाल के दौरान, यूरोपीय संघ ने बार-बार इस बात पर चिंता जताई थी कि संवैधानिक न्यायाधिकरण सरकार के बहुत करीब है। कोर्ट ने कई ऐसे फैसले भी दिए थे, जिनमें यूरोपीय संघ के कानूनों के बजाय पोलैंड के कानूनों को प्राथमिकता दी गई थी।

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