खुद इंटरनेशनल मेडल नहीं जीत सके, लेकिन संभल के इस ‘गुरु’ ने देश को दिलाए 200 से ज्यादा पदक…

गांव कल्यानपुर निवासी भोले सिंह त्यागी (68) की पहचान संभल ही नहीं, आसपास के जिलों में भी कुश्ती गुरु के रूप में है।

वह खुद भले ही कोई राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता न जीत सके हों, लेकिन उनके अखाड़े की मिट्टी से निकली रजनी चाहल, पलक मलिक जैसे कई खिलाड़ी राज्य ही नहीं, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मैट पर भी अपनी ताकत का लोहा मनवा चुके हैं।

राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर करीब 200 पदक इनके ”त्यागी स्पोर्ट्स एंड कन्या गुरुकुल’ से निकले खिलाड़ी जीत चुके हैं।पारंपरिक मिट्टी के अखाड़े के रूप में इसकी शुरुआत सात दशक से भी पहले हुई। खुद भोले सिंह ने पांच साल की आयु से यहीं अखाड़े में उतरकर कुश्ती के दांव-पेच सीखे।

समय से साथ आधुनिक स्वरूप देकर स्पोर्ट्स स्कूल और कुश्ती मैट की सुविधाओं से लैस किया गया। वर्तमान में यह क्षेत्र में विशेष रूप से बालिकाओं और बालकों को कुश्ती, कुराश व अन्य खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।

भोले सिंह त्यागी वर्ष 1970 में प्रदेश स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। हालांकि उन्होंने वर्ष 2016 में कोच्चि शहर में स्थित राजीव गांधी इनडोर स्टेडियम में हुई अंतरराष्ट्रीय कुराश प्रतियोगिता में हिस्सा लिया लेकिन पदक नहीं जीत सके।

उनका सपना अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपने खिलाड़ियों के बल पर भारत की साख बढ़ाने का रहा। इसमें वह कामयाब भी हुए। उनके अखाड़े में दांवपेच सीखकर गांव हाजीबेड़ा की रजनी चाहल ने वर्ष 2016 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गुवाहाटी में हुई दक्षिण एशियाई खेल की कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर नाम रोशन किया।

वह राष्ट्रीय स्तर 20 और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सात पदक जीत चुकी हैं। गांव हजरतनगर गढ़ी की पलक मलिक ने वर्ष 2022 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रूस के ब्लादीबोस्तोक में हुई कुराश प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता है। वह राष्ट्रीय स्तर पर कुराश प्रतियोगिता में दो पदक जीत चुकी हैं।

युवावस्था से ही सिखा रहे कुश्ती व कुराश के दांवपेच

भोले सिंह त्यागी युवावस्था से ही क्षेत्र के बालकों और बालिकाओं को कुश्ती व कुराश के दांवपेच सिखा रहे हैं। उनकी मेहनत रंग लाई है। इस समय सुबह चार बजे से सात बजे तक और शाम को चार बजे से देर शाम सात बजे तक अखाड़े में दांवपेच सिखा रहे हैं।

बताते हैं कि अखाड़े की मिट्टी में एक-दूसरे को चित करने वाले खिलाड़ी अब तक करीब 200 पदक जीतकर नाम रोशन कर चुके हैं। उनकी मेहनत के बलबूते देश और विदेश में संभल का नाम रोशन हुआ है।

यूपी ही नहीं कई प्रदेशों के युवा निखरे

त्यागी स्पोर्ट्स एंड कन्या गुरुकुल में उत्तर सहित कई प्रदेशों के बालक बालिकाएं प्रशिक्षण ले चुके हैं। संभल के अलावा मुरादाबाद, आगरा, हाथरस, मथुरा के साथ-साथ पंजाब और उत्तराखंड के युवाओं ने दांवपेच सीखे हैं। खिलाडि़यों को सफलता मिली है।

यह गर्व की बात है कि अखाड़े में कुश्ती और कुराश के दांवपेच सीखकर खिलाडि़यों ने देश और दुनिया में संभल का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता ही हमारे लिए सबसे बड़ी पूंजी है।

– भोले सिंह त्यागी, कोच त्यागी स्पोर्ट्स एंड कन्या गुरुकुल

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