प्रयागराज में POCSO मामले में दोषी करार, 20 साल कारावास और आर्थिक दंड…

नवाबगंज थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिए गए आरोपित मो. शब्बीर को विशेष पाक्सो न्यायालय ने 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश एवं अपर विशेष न्यायाधीश (पाक्सो) अंजू कनौजिया ने पारित किया।

अदालत ने 17 जून 2026 को आरोपित मो. शब्बीर को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 एबी तथा पाक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद 19 जून को सजा के बिंदु पर सुनवाई की। अभियोजन के अनुसार 10 फरवरी 2022 को आरोपित ने नवाबगंज क्षेत्र की एक बालिका को बेर बीनने का लालच देकर अपने परिसर में बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया।

पीड़िता को चाकू दिखाकर धमकाया गया। किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी गई। बाद में बालिका द्वारा स्वजन को घटना की जानकारी देने पर 13 फरवरी 2022 को मुकदमा दर्ज कराया गया था।

विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने वादी, पीड़िता, चिकित्सक, विद्यालय के प्रधानाचार्य और विवेचक सहित छह गवाहों को अदालत में पेश किया। न्यायालय ने पीड़िता के बयान, मेडिकल साक्ष्य तथा अन्य दस्तावेजी प्रमाणों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपित को दोषसिद्ध पाया।

सजा के प्रश्न पर अभियोजन ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए कठोर सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपित की वृद्धावस्था, आर्थिक स्थिति और पूर्व आपराधिक इतिहास न होने का तर्क रखा। हालांकि न्यायालय ने कहा कि नाबालिग के साथ गुरुतर लैंगिक अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का है और समाज पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

अदालत ने आरोपित को पाक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास व 20 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना जमा होने पर उसकी 80 प्रतिशत राशि पीड़िता के परिवार को प्रतिकर के रूप में दिए जाने का निर्देश भी दिया गया है। साथ ही मामले को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत विचार के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को संदर्भित किया गया है।

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