पीक सीजन में थमी माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई, बेस कैंप के आगे खड़ी हुई बर्फ की दीवार; सैकड़ों पर्वतारोही फंसे…

माउंट एवरेस्ट फतह करने निकले सैकड़ों पर्वतारोही इस वसंत मौसम में एक अनोखी चुनौती का सामना कर रहे हैं। बेस कैंप और कैंप-1 के बीच खुम्बु आइसफॉल में एक विशाल और अस्थिर हिमखंड लटक रहा है, जिसके कारण रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। इससे पीक सीजन की तैयारियां कई हफ्तों से पीछे चल रही हैं और पर्वतरोही बेस कैंप पर ही ठहरे हुए हैं।

यह करीब 100 फीट ऊंचा हिमखंड कैंप-1 के ठीक नीचे स्थित है। आइसफॉल डॉक्टर्स नामक विशेषज्ञ शेरपा टीम ने कई दिनों तक वैकल्पिक रास्ता तलाशने की कोशिश की, लेकिन कोई सुरक्षित बायपास नहीं मिल सका। नेपाल के पर्यटन विभाग के अधिकारी हिमाल गौतम ने बताया कि यह सेराक बेहद अस्थिर है और किसी भी वक्त गिरने का खतरा है।

आइसफॉल डॉक्टर्स की मुश्किल

खुम्बु आइसफॉल एवरेस्ट चढ़ाई का सबसे खतरनाक हिस्सा माना जाता है। यहां गहरी दरारें, लगातार बदलता ग्लेशियर और दस मंजिला इमारत जितनी ऊंची बर्फ की दीवारें होती हैं। आइसफॉल डॉक्टर्स हर साल रस्सियां बांधकर और एल्युमिनियम की सीढ़ियां लगाकर रास्ता तैयार करते हैं।

आमतौर पर अप्रैल के मध्य तक उनका काम पूरा हो जाता है, लेकिन इस बार यह विशाल हिमखंड उनकी राह में बड़ी बाधा बन गया है।

सगरमाथा प्रदूषण नियंत्रण समिति (SPCC) अब हवाई सर्वेक्षण के जरिए स्थिति का जायजा ले रही है। समिति के अध्यक्ष लामा काजी शेरपा ने कहा कि हिमस्खलन का खतरा बहुत ज्यादा है, इसलिए एकमात्र विकल्प इस हिमखंड के खुद पिघलकर गिरने का इंतजार करना है। जब तक यह सुरक्षित स्तर तक नहीं आता, रास्ता खोलने का काम रुका रहेगा।

बर्फ की दीवार के कारण फंसे कई पर्वतारोही

इस सीजन में कुल 410 विदेशी पर्वतारोहियों को एवरेस्ट चढ़ाई की अनुमति मिली है। खास बात यह है कि रिकॉर्ड 54 देशों की 97 महिलाएं इस बार चोटी फतह करने निकली हैं, जो महिलाओं की भागीदारी में नया कीर्तिमान है। बेस कैंप पर विदेशी पर्वतारोहियों के साथ-साथ सैकड़ों नेपाली गाइड और सहायक भी मौजूद हैं।

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