उफनते नाले, बारिश से भीगी पगडंडियां, पहाड़ों से लिपटे बादल और घने जंगल… छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में अबूझमाड़ की यह दुर्गम राह दशकों तक प्रशासन की पहुंच से लगभग दूर रही, लेकिन शुक्रवार को इन्हीं रास्तों पर एक बाइक उम्मीद की नई किरण लेकर बढ़ी।
सुरक्षाबलों के जवान के पीछे बैठी नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन नदी-नालों, पहाड़ों के पार करीब 100 किलोमीटर का कठिन सफर तय कर कोहकापार पहुंचीं।
यह सिर्फ एक प्रशासनिक दौरा नहीं था, बल्कि उस गांव तक शिक्षा की पहली दस्तक थी, जहां आज तक किसी बच्चे ने स्कूल की घंटी नहीं सुनी थी। पहली बार गांव में पाठशाला खुली, घंटी बजी और नन्हे हाथों में किताबें थमाईं गईं।
अबूझमाड़ के इस सुदूर गांव ने शुक्रवार को अपने इतिहास का सबसे सुनहरा सवेरा देखा।कलेक्टर ने विद्यालय के पहले दिन 21 बच्चों, 11 छात्राओं और 10 छात्रों का मुकुट पहनाकर स्वागत किया। उन्हें किताबें दीं और फिर स्वयं बच्चों को पढ़ाया।
यह पूरा अभियान जिला प्रशासन के स्कूल केइंता मिशन का हिस्सा है। इस पहल के जरिये अब तक दो हजार से अधिक बच्चों को स्कूलों और छात्रावासों से जोड़ा जा चुका है। कोहकापार में प्राथमिक विद्यालय की शुरुआत इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में मानी जा रही है।
माओवादियों ने इस क्षेत्र में 458 स्कूलों को बंद करवा दिया था। अब वहां फिर पढ़ाई लौट रही है। विद्यालय के उद्घाटन के बाद कलेक्टर ने गांव में माड़ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया।
ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उन्होंने उनकी समस्याएं सुनीं। सरपंच मनु ध्रुव और ग्रामीणों ने बिजली, नल-जल, मोबाइल नेटवर्क तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग रखी। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।