बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में बुधवार को गिरफ्तार नवीन सिंह को सीबीआइ कोलकाता नहीं ले जा सकी है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि किसी भी आरोपित की ट्रांजिट या न्यायिक रिमांड से पहले उससे संबंधित समस्त कागजात (विवेचना के संपूर्ण कागजात व मेडिकल रिपोर्ट) के जांच के बाद ही आदेश दिया जाता है। ऐसे में बलिया की अदालत ने नवीन को जेल भेजने का आदेश दे दिया।
सीबीआइ ने शाम को ही सीजेएम शैलेश पांडेय की अदालत में समस्त कागजात के साथ वारंट बी के लिए पुन: अर्जी दे दी। इसके तहत पहले से जेल में बंद किसी आरोपित को दूसरे मामले या दूसरी अदालत में पेश करने के लिए आदेश जारी कराया जाता है।
बलिया जेल में निर्माण कार्य जारी होने के कारण नवीन सिंह को पड़ोसी जिले मऊ की जेल में रखा गया है।
नवीन सिंह को लेकर बलिया पुलिस की तत्परता ने सीबीआइ का काम मुश्किल कर दिया। केंद्रीय एजेंसी के इनपुट पर यूपी एसटीएफ ने नवीन को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद बलिया पुलिस ने फौरन फेफना थाने में उसके खिलाफ आयुध अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। इस कारण सीबीआइ को उसका ट्रांजिट रिमांड नहीं मिल सका और अदालती प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।
पुलिस ने नवीन के खिलाफ फेफना थाने में आयुध अधिनियम 1959 की धारा 3 (दो से अधिक हथियारों का अधिग्रहण), धारा 7 (अवैध हथियार रखना), धारा 25 (अवैध हथियारों का परिवहन) और धारा 27 (अवैध हथियार का उपयोग) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
नवीन की निशानदेही पर घर से लगभग तीन किमी दूर स्थित शोरूम के गोदाम से पांच असलहे और बड़ी संख्या में कारतूस बरामद किए गए हैं।
इनमें 9 एमएम की एक पिस्टल, .32 बोर की दो पिस्टल व दो रिवाल्वर, 45 कारतूस और मोबाइल फोन शामिल हैं। सीबीआइ की पूछताछ में नवीन ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
उसने बताया कि सात मई को बांसडीह के शीतल दवनी निवासी ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मनु उसके घर आया था। उसके साथ रसड़ा का राजकुमार सिंह और बांसडीह का गोलू सिंह भी था।