नीरव मोदी के प्रत्यर्पण पर विदेश मंत्रालय का बड़ा अपडेट, ‘यूके से भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया जारी’…

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने मंगलवार को दोहराया कि भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को यूनाइटेड किंगडम (यूके) से भारत लाया जाएगा, लेकिन इसके लिए वहां चल रही सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी है।

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान सवालों का जवाब देते हुए एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नीरव मोदी के मामले में जैसा कि हमने पहले भी बताया है, यूके में कुछ न्यायिक प्रक्रियाएं अभी चल रही हैं। जब ये कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी, इसके बाद उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

उन्होंने कहा क‍ि हम इन कानूनी प्रक्रियाओं पर करीब से नजर रख रहे हैं। सरकार का रुख साफ है कि सभी भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया जाना चाहिए। उन्हें यहां की न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना चाहिए।

मार्च में लंदन स्थित हाई कोर्ट आफ जस्टिस की किंग्स बेंच डिवीजन ने नीरव मोदी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ दोबारा सुनवाई शुरू करने की मांग की थी।

इस मामले में ब्रिटेन की क्राउन प्रासिक्यूशन सर्विस के वकील ने दलीलें रखीं। उन्हें सीबीआइ की एक विशेष टीम ने सहायता दी, जिसमें वे जांच अधिकारी भी शामिल थे जो सुनवाई में मदद के लिए लंदन गए थे।

मामले को दोबारा खोलने की यह याचिका बचाव पक्ष के बिचौलिये संजय भंडारी के मामले में यूके हाई कोर्ट के दिए गए फैसले के आधार पर दायर की गई थी। नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मामले में वांछित है। आरोप है कि सरकारी बैंक के नाम पर जारी फर्जी गारंटी का इस्तेमाल कर विदेश से कर्ज लिया गया था। इसके बाद जनवरी 2018 में वह भारत छोड़कर चला गया था।

इंडिया बुल्स की जांच में चुप्पी पर सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ व दिल्ली पुलिस को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े संदिग्ध लेनदेन के आरोपों पर चुप्पी साधे रखने के लिए सीबीआइ और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को फटकार लगाई। कोर्ट ने उनके बर्ताव को चौंकाने वाला बताया और कहा कि यह आपसी फायदे का मामला लगता है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा, “सीबीआइ और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की लापरवाही के कारण, उन्होंने स्थिति रिपोर्ट तक दाखिल नहीं की और जांच के लिए नियमित मामला दर्ज करने के कदमों के बारे में कोर्ट को बताने में पूरी तरह नाकाम रहे। हम इन एजेंसियों के प्रमुखों को बुलाने वाले थे, लेकिन एएसजी एसवी राजू के इस आश्वासन पर ऐसा नहीं किया कि जरूरी कार्रवाई की जाएगी और दो हफ्ते में स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी जाएगी।”

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