जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया कि मातृत्व अवकाश महिलाओं का संवैधानिक अधिकार है, इसे राज्य की दया नहीं माना जा सकता। यह महिलाओं की गरिमा से जुड़ा अटूट संवैधानिक अधिकार है।
कोर्ट ने वेतन व भत्तों पर रोक लगाने संबंधी 14 अक्टूबर 2025 आदेश को रद करते हुए प्रशासन को सभी याचिकाकर्ता डॉक्टरों को पूर्ण वित्तीय लाभ प्रदान करने का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने डॉ. सोनाक्षी गुप्ता एवं अन्य डॉक्टरों की याचिका स्वीकार करते हुए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि याचियों को मातृत्व अवकाश की अवधि तथा अवकाश के कारण बढ़ाई गई अवधि के लिए पूरा वेतन और सभी भत्ते जारी किए जाएं।
महिला डॉक्टरों ने 14 अक्टूबर 2025 की उस सरकारी अधिसूचना को चुनौती दी थी, जिसके तहत यह कहते हुए उनका वेतन रोक दिया गया था कि मातृत्व अवकाश के दौरान वह कार्य पर नहीं थीं।
कोर्ट ने कहा कि मातृत्व अवकाश में वेतन रोककर प्रशासन ने महिलाओं के लिए बनाए गए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा प्रविधान को आर्थिक दंड में बदल दिया। मातृत्व अवकाश जैसी स्वाभाविक मानवीय अवस्था के लिए महिलाओं को दंडित करना एक संवेदनशील कल्याणकारी राज्य की भावना के विपरीत है।