सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने CBI के नेतृत्व में बहु-एजेंसी जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि अगर गर्मी की छुट्टियों के बाद नियमित कामकाज शुरू होने पर सुनवाई होगी, तो आसमान नहीं गिर जाएगा।
दरअसल, दो अधिवक्ताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) में राम मंदिर में एकत्रित दान निधि से चोरी मामले में सीबीआई और अन्य एजेंसियों द्वारा अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही जांच से विश्वास पैदा नहीं होता है, और आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण सबूतों को ठीक से संरक्षित नहीं किया जा रहा है।
तत्काल सुनवाई की याचिका खारिज
इस पर न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और शील नागू की पीठ ने तत्काल सुनवाई की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि इस याचिका पर 12-17 जुलाई के सप्ताह के दौरान सुनवाई की जाएगी।
चंपत राय का बयान दर्ज
गौरतलब है कि यह याचिका ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज किया जा चुका है। जबकि ट्रस्टी अनिल मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ ट्रस्ट अधिकारियों के बयान भी आवश्यकता पड़ने पर दर्ज किए जा सकते हैं।
ट्रंस्ट की चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि
इससे पहले, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आरोपों पर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि वह स्तब्ध, आहत और बेहद दुखी है और निष्पक्ष जांच के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ट्रस्ट ने इन आरोपों पर दुख जताते हुए चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि की है।
ट्रस्ट ने राम भक्तों को आश्वस्त किया है कि भगवान राम को व्यक्तिगत रूप से अर्पित की गई सभी मूल्यवान वस्तुएं, जिनमें चांदी की ईंटें और आभूषण पूरी तरह सुरक्षित है और उनका पूरा हिसाब रखा गया है।