केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ स्थित सुखना झील का 2200 मीटर लंबा, पांच लेन वाला अंतरराष्ट्रीय मानकों का रोइंग कोर्स आज गंभीर उपेक्षा का शिकार है। कभी भारत और एशिया के बेहतरीन रोइंग स्थलों में गिने जाने वाले इस कोर्स की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
रखरखाव की कमी, गाद जमाव, कूड़ा-कचरा और जलीय वनस्पतियों के बढ़ते फैलाव ने इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रोइंग समुदाय का कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण और जीर्णोद्धार के ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह विश्वस्तरीय खेल धरोहर हमेशा के लिए अपनी पहचान खो सकती है।
रोइंग एसोसिएशन से जुड़े सदस्यों के अनुसार कोर्स के स्टार्टिंग क्षेत्र के पास कमल के पौधों की घनी वृद्धि खिलाड़ियों के लिए नई चुनौती बन गई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि कमल के पौधे प्राकृतिक रूप से फैले हैं या इन्हें लगाया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि गाद जमाव से पानी उथला होने और नियमित सफाई नहीं होने के कारण जलीय वनस्पतियां तेजी से फैल रही हैं। इससे नावों की शुरुआत, लेन का संरेखण, प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
रोइंग समुदाय का यह भी आरोप है कि कभी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उपयोग होने वाला लगभग 2000 मीटर का मानक कोर्स अब राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताओं में सीमित दूरी तक ही प्रभावी रह गया है। उनका कहना है कि प्रशासनिक निर्णयों, रखरखाव की कमी और झील प्रबंधन की बदलती प्राथमिकताओं के कारण यह स्थिति बनी है।
2009 में जला वॉचटावर आज तक नहीं बना
रोइंग खिलाड़ियों और कोचों की एक प्रमुख मांग 2009 में आग से नष्ट हुए वॉचटावर के पुनर्निर्माण की है। सात अक्टूबर 2009 को आग में नष्ट हुआ यह टावर पूरे दो किलोमीटर लंबे कोर्स की निगरानी के लिए बनाया गया था। इससे कोच और अधिकारी प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिताओं के दौरान पूरे ट्रैक पर नजर रख सकते थे।
रोइंग एसोसिएशन कई बार इसके पुनर्निर्माण की मांग कर चुकी है, लेकिन अब तक इसे दोबारा नहीं बनाया गया है। प्रशासन की ओर से इस देरी का कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण भी सामने नहीं आया है।
विशेषज्ञों को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखने का आरोप
चंडीगढ़ रोइंग एसोसिएशन का आरोप है कि रोइंग से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में खेल के विशेषज्ञों से पर्याप्त परामर्श नहीं किया गया। उनका कहना है कि प्रतिस्पर्धी रोइंग अवसंरचना को मजबूत करने के बजाय अन्य परियोजनाओं पर अधिक ध्यान दिया गया।
हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है कि निर्णय प्रक्रिया में किन विशेषज्ञों को शामिल किया गया था।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान वाला केंद्र
सुखना झील का रोइंग कोर्स लंबे समय तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी करता रहा है। यहां एशियाई रोइंग चैंपियनशिप सहित कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताएं आयोजित हो चुकी हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस विश्वस्तरीय सुविधा का संरक्षण, नियमित रखरखाव और आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए ताकि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण और प्रतियोगिता सुविधाएं मिल सकें।
रोइंग समुदाय ने प्रशासन से मांग की है कि कोर्स की सफाई, गाद हटाने, जलीय वनस्पतियों की नियमित निकासी, वॉचटावर के पुनर्निर्माण और खेल विशेषज्ञों की सलाह से रोइंग अवसंरचना के विकास के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि चंडीगढ़ की यह खेल विरासत सुरक्षित रह सके।