सरकार स्किलिंग के नए मंत्र पर काम करने जा रही है। इनमें मुख्य रूप में डिजिटल स्किलिंग पासपोर्ट, स्किलिंग एक्सचेंज और स्किलिंग स्कोर शामिल हैं।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इंटीग्रेटेड स्कीम इन स्किलिंग आर्किटेक्चर (आईएसएसए) आरंभ करने के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रविधान किया गया है।
इस स्कीम के तहत नीति आयोग की सिफारिश में सुझाए गए नए मंत्र पर अमल हो सकता है।
स्किलिंग के लिए इन तीन तरीकों को अपनाने से नौकरी देने वाले और खोजने वाले दोनों को आसानी होगी। अभी लोन लेने दौरान बैंक उस व्यक्ति के पुराने रिकार्ड को जानने के लिए सिबिल स्कोर चेक करता है। वैसे ही किसी व्यक्ति के स्किल, योग्यता, काम की भूमिका की जानकारी डालकर व्यक्ति का फ्यूचर रेडिनेस इंडेक्स या स्किल स्कोर का पता किया जा सकेगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से चलने वाला यह टूल बता देगा कि वह व्यक्ति भविष्य की टेक्नोलाजी व उद्योग जगत में होने वाले बदलाव में कितना उपयोगी रहेगा। डिजिटल स्किल पासपोर्ट में व्यक्ति अपने सभी स्किल को एक जगह बता सकेगा और भविष्य में जो भी स्किल वह हासिल करता है, वह सब उसके स्किल पासपोर्ट में जुड़ता जाएगा।
नीति आयोग का कहना है कि ऑटोमेटेड परमानेंट अकादमिक एकाउंट रजिस्ट्री (अपार) पहचान नंबर की तरह डिजिटल पासपोर्ट भी तैयार किया जा सकता है। डाटा पर आधारित स्किलिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए आयोग ने राज्य स्तर पर डिजिटल स्किल एक्सचेंज बनाने की सिफारिश की है।
डिजिटल एक्सचेंज से निजी उद्योग जगत व सरकार की संस्था जुड़े होंगे। यहां स्किल्ड व्यक्ति अप्रेंटिसशिप और पार्ट टाइम नौकरी भी ढूंढ़ सकेंगे। कम या गैर स्किल्ड श्रमिकों को जरूरतमंद उद्यमियों से आसानी से मिलाने के लिए मोबाइल आधारित वर्कफोलियो प्लेटफार्म बनाने की सिफारिश की गई है।
स्किलिंग का प्रोग्राम पिछले 11 सालों से चल रहा है और इस अवधि में करीब 7.6 करोड़ लोगों को विभिन्न रूप में स्किल किया गया। नीति आयोग का मानना है कि जितने बड़े पैमाने पर लोग स्किल किए गए, उसका फायदा अर्थव्यवस्था को नहीं मिला। क्योंकि इंडस्ट्री की जरूरत के मुताबिक स्किल नहीं किए गए।
अब वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य हासिल करने के लिए एक अरब से अधिक लोगों को स्किल करना होगा। इसलिए घरों में काम करने वाले, स्वास्थ्य की वजह से कोई काम नहीं करने वालों के साथ उन युवाओं को भी स्किल किया जाना चाहिए जो न तो पढ़ाई और न ही कोई काम कर रहे हैं।
आयोग ने जर्मनी, साउथ कोरिया, आस्ट्रेलिया जैसे देशों के तर्ज पर स्कूल से ही स्किलिंग शुरू करने के लिए कहा है। स्कूल के पाठ्यक्रम को बदलने के लिए कहा गया है।