राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप लीक की घटनाओं से बेहद नाराज हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने गोपनीय जानकारी के लीक होने के मामले में लगभग 50 जॉइंट स्टाफ अधिकारियों पर पॉलीग्राफ (झूठ पकड़ने वाला) टेस्ट करवाया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगस्त में जॉइंट स्टाफ के सदस्यों का परीक्षण किया गया। जांच का केंद्र अमेरिका के उन्नत हथियारों के भंडार में कमी से जुड़ी लीक थी।
न्यूयॉर्क टाइम्स और सीबीएस न्यूज जैसी रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें लंबी दूरी की मिसाइलों और पैट्रियट इंटरसेप्टर जैसे महत्वपूर्ण हथियारों की कमी के बारे में पत्रकारों को दी गई जानकारी शामिल थी।
सीबीएस न्यूज के अनुसार, गर्मियों में पहले भी दर्जनों अधिकारियों का टेस्ट हो चुका था, जिनमें यूएस सेंट्रल कमांड और अन्य कमांड के अधिकारी शामिल थे। पॉलीग्राफ टेस्ट आमतौर पर सुरक्षा क्लीयरेंस के लिए समय-समय पर किए जाते हैं, लेकिन इस बार इतने बड़े पैमाने पर टेस्ट कराना असामान्य माना जा रहा है।
स्रोतों के मुताबिक, मीडिया को लीक करने संबंधी सवालों में किसी ने फेल नहीं किया। हालांकि, एक स्रोत ने कहा कि वर्गीकृत हथियार जानकारी तक पहुंच वाले लोगों की संख्या बहुत कम थी, जिससे विदेशी खुफिया एजेंट की आशंका भी जताई गई।
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन का टेस्ट नहीं किया गया। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने जुलाई में पेंटागन और जस्टिस डिपार्टमेंट के बीच लीकर्स की पहचान और मुकदमा चलाने के लिए संयुक्त टास्क फोर्स बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि लीक से जान जोखिम में पड़ सकती है।
पेंटागन प्रवक्ता सीन पर्नेल ने कहा कि विभाग आंतरिक जांच मामलों पर टिप्पणी नहीं करता, लेकिन वर्गीकृत राष्ट्रीय सुरक्षा जानकारी के लीक को बेहद गंभीरता से लेता है और जांच करता है।