नेपाल बाढ़ की खौफनाक कहानी: जब बंद हो गए बचने के सारे रास्ते, तब WhatsApp बना जिंदगी बचाने का सहारा…

नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के कारण त्रिशूली 3ए जलविद्युत परियोजना की एक सुरंग में फंस गए दो लोगों के लिए ये नौ दिन नौ महीनों के समान रहे। भगवान कृष्ण के जन्मदिवस ‘जन्माष्टमी’ पर इन दो लोगों ने भी दोबारा अपने जीवन का सूरज देखा।

बचाए गए एक व्यक्ति ने बताया कि इन नौ दिनों के दौरान वह इस उम्मीद में ‘हरे कृष्ण’ मंत्र का जाप करता रहा कि उसे बचा लिया जाएगा। आपदा के 10वें दिन की सुबह दोनों के जीवित बचने को किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा।

नेपाली सेना ने कहा, ’10 दिनों के अंधेरे के बाद, जिंदगी ने फिर रोशनी देखी है।’ साथ ही बताया कि उन्होंने सुरंग से एक शव भी बरामद किया है। इस विनाशकारी आपदा में अब तक 1300 से अधिक लोग मारे गए हैं और 5600 से अधिक लापता हैं जिनमें लगभग 600 बच्चे हैं।

नेपाली अधिकारियों द्वारा जारी वीडियो में दिखाया गया है कि 45 वर्षीय कबीर महर्जन को जमीन में बने एक गड्ढे से बाहर निकाला जा रहा है और आस-पास के लोग खुशी से चिल्ला रहे हैं, फिर उन्हें एक स्ट्रेचर पर नीचे उतारा जा रहा है। उनके साथी 30 वर्षीय संजय शाह को एक मजदूर की पीठ पर बाहर लाया गया, उनका चेहरा कीचड़ से सना हुआ था।

सेना के डाक्टरों ने उन्हें आक्सीजन मास्क लगाया और बचाव शिविर के अंदर उनके स्वास्थ्य की जांच की। शाह परियोजना में मैकेनिकल फोरमैन हैं, जबकि महर्जन मैकेनिकल सुपरवाइजर हैं। दोनों को काठमांडू स्थित सैन्य अस्पताल के आइसीयू में भर्ती किया गया है और उनकी हालत स्थिर है।

ऊर्जा मंत्री के एक सहायक ने बताया कि महर्जन अपने हाथ या पैर नहीं हिला सकते, लेकिन शाह की चोटें गंभीर नहीं हैं। इन दो लोगों के जीवित बचा लिए जाने से उम्मीद जगी है कि बाढ़ से प्रभावित कई पनविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे दूसरे लोगों को भी जीवित बचाया जा सकता है। हालांकि नेपाल सेना ने बताया कि उसने लांगटांग हाइड्रोपावर स्टेशन की एक सुरंग से दो शव बरामद किए हैं और अन्य लोगों की तलाश जारी है।

जब तक दूसरे लोग निकले, मेरे लिए देर हो चुकी थी…

सुरक्षित निकाले जाने के तुरंत बाद शाह ने संक्षिप्त बातचीत में बताया, ‘मैं पिछले नौ दिनों से हरे कृष्ण महामंत्र का जाप कर रहा था।’ उन्होंने 26 अगस्त का घटनाक्रम बताते हुए कहा कि जब बाढ़ आई तो वह नियंत्रण कक्ष में काम कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मेरी जिम्मेदारी सबकी जान बचाने की थी। मैंने सबसे भागने के लिए कहा। जब तक दूसरे लोग निकले, तब तक मेरे लिए बहुत देर हो चुकी थी।’

यह पूछे जाने पर कि अंदर अभी भी कितने लोग फंसे हो सकते हैं, उन्होंने कहा, ‘सिर्फ तीन या चार लोग थे जिनसे हम आस-पास बात करके या आवाज लगाकर बात कर पाए।’

साथ ही कहा कि सुरंग के अंदर और भी लोग फंसे हो सकते हैं, जिसमें पावरहाउस के आसपास की जगह भी शामिल हैं। सुरंग बहुत लंबी है और बाढ़ के पानी का जोर लोगों को और अंदर ले गया होगा।

स्वजनों की खुशी का ठिकाना नहीं

ललितपुर निवासी कबीर महर्जन की पत्नी हीरा शोभा ने कहा, ‘उन्हें दूसरी जिंदगी मिली है। हम बहुत खुश हैं। हम इंतजार कर रहे थे। अब मैं अपने पति को देखने अस्पताल जा रही हूं।’ प्रेट्र के अनुसार उन्होंने कहा, “उन दिनों को काटना बहुत मुश्किल था। ये एक या दो दिन नहीं थे। हम न खा सकते थे और न ही सो सकते थे। लेकिन हमें विश्वास था कि वह अभी भी वहीं हैं।

हमें विश्वास था कि वह वापस आ जाएंगे। हमें दुख हुआ क्योंकि इसमें थोड़ा अधिक समय लगा। जिन्होंने उन्हें बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाली, पूरी बचाव टीम को मेरा दिल से धन्यवाद।” कबीर महर्जन के भाई अमीर महर्जन ने कहा कि उन्हें आधिकारिक तौर पर कोई खबर नहीं मिली है, लेकिन उन्हें अस्पताल जाने के लिए कहा गया है।

सप्तसरी निवासी संजय शाह की पत्नी लक्ष्मी कुमारी शाह भी अपने पति के जीवित बचने से बहुत खुश हैं। उन्होंने आइएएनएस से बातचीत में कहा, ‘मैं और मेरा परिवार बहुत खुश है। जब मुझे सुबह करीब 8:30 बजे उन्हें बचा लिए जाने के बारे में पता चला, तो मैं घर पर ही थी।’ उन्होंने कहा कि पिछले नौ दिन उनके और उनके परिवार के लिए बहुत पीड़ादायक थे। साथ ही बताया कि अपने पति से मिलने काठमांडू जा रही हैं।

वाट्सएप ग्रुप बनाकर बताया बचाव का तरीका

बचान अभियान के दौरान वाट्सएप ग्रुप में विशेषज्ञों की एक टीम बचावकर्मियों का मार्गदर्शन कर रही थी। विशेषज्ञों का यह मार्गदर्शन जीवित लोगों को खोजने में हेलीकाप्टर और भारी मशीनरी के साथ एक कीमती टूल बन गया।

नेपाली सेना ने बताया कि अपर त्रिशूली 3ए प्रोजेक्ट के आसपास और भी खोज एवं बचाव अभियान चल रहे हैं। इनका नेतृत्व सेना व पुलिस कर रही हैं और इसमें भारत, दक्षिण कोरिया व चीन के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

ऐसे चला बचाव अभियान

बचाव अभियान में शामिल रहे ‘इंटरनेशनल टनलिंग एंड अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन’ के प्रेसीडेंट अर्नोल्ड डिक्स ने एक मीडिया ग्रुप को बताया कि वे जीवित बचे लोगों तक कैसे पहुंचे। डिक्स ने कहा कि “यह चमत्कारों की परत दर परत जैसा है। पहली मुश्किल सुरंग के प्रवेश द्वार का पता लगाना था, जो बाढ़ की वजह से पहचान में नहीं आ रहा था।’

उन्होंने कहा, ‘मैंने कभी ऐसा बचाव अभियान नहीं देखा जिसमें आपको किसी ऐसी सुरंग का प्रवेश द्वार ढूंढना पड़ा हो जो पहले पहाड़ी पर थी, लेकिन अब अंडरग्राउंड हो गई है। आप इससे आपदा की भयावहता का अंदाज लगा सकते हैं, इसने प्रवेश द्वार को पूरी तरह से दबा दिया था।’

उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग तकनीक, पुराने भौगोलिक मानचित्र, आपदा के बाद इलाके की सेटेलाइट तस्वीरों, हेलीकाप्टर से वीडियो फुटेज और पहाड़ की सतह पर जो कुछ भी मिला (जैसे बिजली के खंभे) उसका इस्तेमाल करके उन्होंने और उनकी टीम ने प्रवेश द्वार की संभावित जगह का पता लगाया और खुदाई शुरू की। जब प्रवेश द्वार मिल गया तो अगली चुनौती बचे हुए लोगों को ढूंढना था।

डिक्स ने कहा, ‘हमें पता था कि वे आगे होंगे, लेकिन हमें ठीक से नहीं पता था कि वे कहां हैं। ऐसे में आपको बस सही दिशा में खुदाई शुरू करनी होती है और अगर आपको कोई सुनाई दे रहा है तो आप ध्यान से सुनें।’ डिक्स ने कहा कि बचाव दल को एक ऐसी सुरंग से गुजरना पड़ा जो पूरी तरह से कीचड़ और पत्थरों से बंद थी, जिनमें कुछ तो कारों से भी बड़े थे।

रास्ता बनाने के लिए विस्फोटकों का इस्तेमाल करना पड़ा। हालांकि इससे (सुरंग में फंसे) लोगों के उड़ने और खुद के भी उड़ने का खतरा रहता है। नेपाली सेना ने इसे बखूबी किया। उसी समय उन्हें पता चला कि सुरंग में अभी भी पानी भरा हुआ था। एक्सकेवेटर और पंपिंग मशीनों का इस्तेमाल करके नेपाली बचाव दल ने सुरंग से बाहर नदी तक कई खाइयां खोदीं, ताकि पानी निकाला जा सके।

आखिर में उन्हें सुरंग के ऊपर मलबे से इंसान के आकार की एक सुरंग खोदनी पड़ी। शुक्रवार सुबह-सुबह बचाव दल को कुछ आवाजें सुनाई दीं। बचाव दल ने आवाज लगाई, “चिंता मत करो, हम तुम्हें बचाने के लिए यहां हैं” और उन्हें हल्की सी ‘ठीक है’ सुनाई दिया।

इसके बाद संजय शाह और कबीर महर्जन को जीवित बाहर निकाल लिया गया। डिक्स का अंदाजा है कि बचाव दल ने अब तक प्रवेश द्वार से लगभग 60 मीटर खुदाई कर ली होगी और पहाड़ के अंदर मौजूद पावरहाउस तक पहुंचने के लिए उन्हें 150 मीटर और खुदाई करनी होगी।

चीन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हुई

तिब्बत के गिरोंग काउंटी में बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है, जबकि 531 अन्य अभी भी लापता हैं। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि 30 अगस्त को जारी आंकड़ों के अनुसार लापता लोगों में 261 विदेशी शामिल हैं, जिनमें भारत के 49 और अन्य देशों के 22 शामिल हैं।

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